gauragamka
It is a common Place where people collect and discuss various issues.
Sunday, June 16, 2013
Thursday, June 13, 2013
आसंडा मामला ---राठी बनाम हुड्डा
आसंडा मामला ---राठी बनाम हुड्डा
हरयाणा के झझर जिले के आसंडा गाँव के राठी गोत्र के रामपाल का विवाह रोहतक जिले के सांघी गाँव के हुड्डा गोत्र की लड़की सोनिया से हुआ । सितम्बर 2004में राठी खाप के मुखिया धर्मसिंह राठी की अध्यक्षता में खाप पंचायत हुई ,जिसमें रामपाल और सोनिया के विवाह को रद्द कर दिया गया । उनको भाई बहन घोषित किया गया । कुछ युवाओं के साथ पंचायत के एक बुजुर्ग रामपाल के घर गए और उसे दस रूपये का नोट देकर सोनिया को शगुन के रूप में देने को कहा । रामपाल ने दबाव में नोट स्वीकार कर लिया हालाँकि सोनिया ने साहस दिखाया और बुजुर्ग का विरोध करते हुए कहा कि जिसका बच्चा उसके गर्भ में है वह उसे भाई कैसे स्वीकार कर सकती है । विरोधस्वरूप वह घर से बाहर चली गयी । उसे गहरा सदमा लगा और वह बीमार पड़ गई और उसे रोहतक अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा ।
यह पूरी घटना इतनी अजीब थी कि विश्वास करना मुश्किल था । खाप द्वारा स्वीकृत किसी भी वैवाहिक प्रतिबन्ध की उलंघना नहीं की गई थी । इस मामले में गोत्र ,खाप ,गाँव ,और जिला हर चीज अलग थी ।
कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आसंडा गाँव का दौरा किया और सबसे पहले वे वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य के पद से सेवानिवृत बुजुर्ग व्यक्ति से मिले जो खाप पंचायत में पञ्च थे ,जिसमें विवादापस्त निर्णय लिया गया था । उनसे बड़ी विनम्रता से पूछा गया कि जब विवाह सम्बन्धी किसी प्रतिबंध का उलंघन नहीं किया गया है तो ऐसा फतवा देने के पीछे क्या कारन थे ? लड़की के पिता हरयाणा पुलिस में सेवारत थे और अपने नाम के साथ हुड्डा लिखते थे और लड़की के दादा मृत्यु से पूर्व हुड्डा खाप के मुखिया भी रहे थे । उनहोंने बताया कि वह लड़की ऐसे परिवार से आई है जो वर्तमान में तो हुड्डा है ,लेकिन पाँच सौ साल पहले यह परिवार राठी था । इसलिए यह भाई बहन के बीच शादी है ।
उस आदमी से जब यह पूछा गया कि किसने , कब और कैसे खोज की और इसके ऐतिहासिक प्रमाण क्या हैं तो उत्तर में उसने एक असंगत कहानी बताई । उनके मुताबिक पाँच सौ साल पहले सांघी गाँव की हुड्डा की लड़की की शादी राठी लड़के से हुई जिसकी बाद में मृत्यु हो गई । लडकी गर्भवती थी और सांघी में अपने माता पिता के पास रहने लगी । उसकी सन्तान ने हुड्डा गोत्र अपना लिया जबकि वास्तव में वे राठी थे । उनका ध्यान इस और दिलाया गया कि कितने ही अल्प संख्यक गोत्र के जाटों ने गाँव के वर्चस्वी गोत्र को स्वीकार कर लिया और किसी ने ऐतराज नहीं किया । लेकिन वह व्यक्ति अपनी जिद्द पर अड़ा रहा और जोर देता रहा था कि खाप पंचायत ने जो निर्णय लिया वह सही था । डी आर चौधरी जी ने उससे कहा कि आप वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य के पद से सेवानिवृत हैं,उच्च शिक्षित व्यक्ति हैं ,आपने चार्ल्स डार्विन का मानव की उत्पत्ति का सिद्धांत तो पढ़ा होगा कि मनुष्य का विकास बंदरों से हुआ है । यदि पीछे जाओगे तो बंदरों के पास पहुंचोगे । लड़ने की मुद्रा में उसने कहा ,”हाँ ,मुझे इस सिद्धांत का कुछ कुछ याद है लेकिन डार्विन हो या कोई और यहाँ खाप का हुकम चलता है और यदि रामपाल -सोनिया पति पत्नी के रूप में गाँव में रहेंगे तो खून खराबा अवश्य होगा । “आस पास खड़े लोगों ने उसकी बात ते हुएसे सहमत हो सिर हिलाया ।
रामपाल के घर में तीन छोटे छोटे कमरे थे और मकान की हालत बेहद खस्ता थी । एक कमरे में अधरंग से पीड़ित उसकी मां चारपाई पर लेती रहती थी । रामपाल छोटी सी जोत का मालिक था और अपने घर में सरकार द्वारा तैनात पुलिस वालों की खातिर दारी करना उसके लिए बहुत मुश्किल काम था । वह सदमाग्रस्त हो गया था और बेसिरपैर की बातें करता रहता था । उसकी पत्नी सोनिया अस्पताल में ही थी । उसको उसकी बहुत चिंता थी । हालाँकि उसकी पत्नी के साहसिक कदम से वह कुछ होंसले में नजर आने लगा था ।
राठी खाप का प्रधान भाप रोदा का था । उसका स्पष्ट मत था कि पति पत्नी के रूप में वे आसंडा गाँव में नहीं रह सकते , उन्हें कहीं और जाना पड़ेगा । बाहर के लोग उनकी परम्पराओं से अनजान हैं तो हम क्या कर सकते हैं । हमें परम्पराओं का सम्मान तो करना ही होगा
। पूरी घटना कई दिनों तक मीडिया की सुर्ख़ियों में छाई रही । प्रिंट मीडिया के पत्रकार आसंडा में कई दिन तक डेरा डाले रहे और कुछ टी वी चैनल भी आते रहे । इसके बाद पी यू सी आर से संम्बद्ध वकील ने पंजाब व् हरयाणा उच्च न्या यालय में जनहित याचिका दायर की तथा अखिल भारतीय जनवादी महिला समिती और कई संस्थाओं ने साथ दिया । अक्तूबर २ ० ० ४ में न्या यालय ने निर्णय दिया कि पंचायत का दम्पति के जीवन में दखल करने का कोई अधिकार नहीं है और स्थानीय प्रशासन को दम्पति की सुरक्षा तथा गाँव में बिना किसी भय के बसने में सहयोग करने का निर्देश दिया । जिला पुलिस अधीक्षक भरी पुलिस बल के साथ आसंडा गाँव में पहुंचे । खाप पंचायत की बैठक बुलाई गई और दबाव में निर्णय को बदला गया । से यह दम्पति गाँव में रह रहा है हालाँकि बहुत देर तक इस भयानक अनुभव से गुजरी । बहुत बार अस्पताल में वह तथा उसकी नन्द शीला आते रहे हैं । मुलाकात कई बार हुई । कभी कभार तान्नों का सामना करना पड़ता है । वह सामना करती है ।
Wednesday, June 12, 2013
BAL DIWAS
ये बचपन जो भूखा है और ये बचपन जिंसकी भूख किसी और को मिटानी चाहिए अपने नन्हें
नन्हें हाथों से काम कर असहाय माता - पिता की भूख मिटाने के लिए काम कर रहे हैं और कहीं कहीं तो नाकारा बाप के अत्याचारों से तंग आकर उसकी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी .
मेरे कोलीग ने कहा - कोई लड़की काम करने के लिए आपके जानकारी में हो तो बताना . घर में रखना है कोई तकलीफ नहीं होगी , घर वालों को हर महीने पैसे भेजते रहेंगे . क्या कहता उनसे ? उनकी बहू और बेटियां बहुत नाजुक है कि वह अपने बच्चों तक को नहीं संभाल सकती हैं और घर के काम के लिए उन्हें कोई बच्ची चाहिए क्योंकि उसको डरा धमका कर काम करवाया जा सकता है और अगर बाहर की होगी तो उसके कहीं जाने का सवाल भी नहीं रहेगा । बड़े मध्यम वर्ग की यह जीवनशैली बन गयी है । बल मजदूरी विरोधी दिवस मनाना जरूरी है । मगर इस लाइफ स्टाइल का क्या विकल्प है ।
Tuesday, June 11, 2013
जनून
क्या कहूं तुम से कि ये क्या है जनून
जान का रोग है यह बड़ी बला है जनून
जनून ही जनून है दिलो दिमाग में
सारे आलम में ही भर रहा है जनून
जनून मेरा प्यार मेरा इश्क है यारो
यानि अपना ही मुबतला है जनून
गरीब की मेहनत मशकत में यारो
लगता खुद से भी ज्यादा है जनून
कौन मकसद को जनून बिन पहुंचा
आरजू है जनून और मुद्दा है जनून
तुमने आज तक नहीं समझा मतलब
मगर एक तरह से जिया है जनून
क्या कहूं तुम से कि ये क्या है जनून
जान का रोग है यह बड़ी बला है जनून
जनून ही जनून है दिलो दिमाग में
सारे आलम में ही भर रहा है जनून
जनून मेरा प्यार मेरा इश्क है यारो
यानि अपना ही मुबतला है जनून
गरीब की मेहनत मशकत में यारो
लगता खुद से भी ज्यादा है जनून
कौन मकसद को जनून बिन पहुंचा
आरजू है जनून और मुद्दा है जनून
तुमने आज तक नहीं समझा मतलब
मगर एक तरह से जिया है जनून
Saturday, June 8, 2013
छोटे शहर बदल रहे
छोटे शहर बदल रहे
रात के ढाई बज चुके हैं यारो पर
मेरा शहर अब भी जाग रहा है
मेरे युवा भारत की आँखों में नींद
नहीं है
कुछ नौजवान डी जे की धुन पर
थिरक रहे हैं और मस्ती में मस्त हैं
यह सीन किसी मैट्रो शहर का हो
मगर ऐसा नहीं है यह सीन तो अब
लखनऊ बनारस लुधियाना और
रायपुर इंदौर भोपाल गुडगाँव
जैसे शहरों में भी रात का शबाब
अपने पूरे यौवन पर होता है
नौजवान यहाँ के सो कर नहीं बिताते
रातें बिताते है जाग जाग कर यहाँ
कहते जिन्दगी बहुत हसीं हो जाती
माई न्ड रिफरेशमेंट हम सब की हो पाती
इन शहरों का भूगोल तो अब भी
वैसा ही है मेरे ख्याल में
मगर बदल गए युवाओं के मिजाज
दिल्ली मुंबई कोलकता जैसे शहरों
या फिर में यू के या यू एस ए में
कुछ साल के बाद
वापसी हुई है नौजवानों की तो
अपने साथ उन शहरों के लाये हैं
लाइफ़ स्टाइल और मस्ती के नुस्खे
सौगात में
जबर दस्त ललक है इस तरह से
जीने की उनके दिल में आज
इस बदले मिजाज को बाजार ने
बहुत अच्छी तरह पहचान लिया है
इसीलिये छोटे शहरों में भी इसके
शो रूम ,इटिंग पॉइंट्स उभर रहे हैं
और एक मॉल कल्चर विकसित
हो रही है
हमारे में से कुछ बुजुर्ग
युवाओं की इस आजाद ख्याली को
सभ्यता और संस्कृति की राह में
बड़ी रूकावट मान रहे हैं
वे इसको युवाओं की महत्वाकांक्षा और
भोग विलास का नाम दे रहे हैं
पर सामाजिक चिन्तक इस बदलाव का
स्वागत करते नजर आये
रात के ढाई बज चुके हैं यारो पर
मेरा शहर अब भी जाग रहा है
मेरे युवा भारत की आँखों में नींद
नहीं है
कुछ नौजवान डी जे की धुन पर
थिरक रहे हैं और मस्ती में मस्त हैं
यह सीन किसी मैट्रो शहर का हो
मगर ऐसा नहीं है यह सीन तो अब
लखनऊ बनारस लुधियाना और
रायपुर इंदौर भोपाल गुडगाँव
जैसे शहरों में भी रात का शबाब
अपने पूरे यौवन पर होता है
नौजवान यहाँ के सो कर नहीं बिताते
रातें बिताते है जाग जाग कर यहाँ
कहते जिन्दगी बहुत हसीं हो जाती
माई न्ड रिफरेशमेंट हम सब की हो पाती
इन शहरों का भूगोल तो अब भी
वैसा ही है मेरे ख्याल में
मगर बदल गए युवाओं के मिजाज
दिल्ली मुंबई कोलकता जैसे शहरों
या फिर में यू के या यू एस ए में
कुछ साल के बाद
वापसी हुई है नौजवानों की तो
अपने साथ उन शहरों के लाये हैं
लाइफ़ स्टाइल और मस्ती के नुस्खे
सौगात में
जबर दस्त ललक है इस तरह से
जीने की उनके दिल में आज
इस बदले मिजाज को बाजार ने
बहुत अच्छी तरह पहचान लिया है
इसीलिये छोटे शहरों में भी इसके
शो रूम ,इटिंग पॉइंट्स उभर रहे हैं
और एक मॉल कल्चर विकसित
हो रही है
हमारे में से कुछ बुजुर्ग
युवाओं की इस आजाद ख्याली को
सभ्यता और संस्कृति की राह में
बड़ी रूकावट मान रहे हैं
वे इसको युवाओं की महत्वाकांक्षा और
भोग विलास का नाम दे रहे हैं
पर सामाजिक चिन्तक इस बदलाव का
स्वागत करते नजर आये
Friday, June 7, 2013
जीत की घंटी
शोर गुल बहुत है नहीं आवाज सुनाई देती
बनावटी ही बनावटी हर चीज दिखाई देती
कैसे रहते हैं लोग अंधेरों के दरमियाँ यारो
दिखाई वहां की हमें ये कैसी सच्चाई देती
मेरे बदन में दर्द के खंजर उतार कर यारो
पूछते हैं लोग मुझसे राहत कैसे दवाई देती
हमारे घर में आग लगी कोई बात नहीं यारो
खुद को लगी तो दिखाई जनता की बेवफाई देती
जिद्द है उनकी यही तो जिद्द है अपनी भी
हांर ना मानेंगे यारो जीत की घंटी सुनाई देती
इतिहास अपना
जल्दी ही भूल गए हम इतिहास अपना
पता नहीं कहाँ पे खोया अहसास अपना
झूठ छाई है चारों ओर पता है ये हमको
ताकत है भले ही चेहरा हो उदास अपना
साजिशें रची जा रही मेरी सच के खिलाफ
भयानक बहुत लगता आस पास अपना
महिलाओं पर रेप असुरक्षित समाज
लहता हमें पूरा समाज बदहवास अपना
वो सुबह कभी तो आयेगी मुझे यकीं है
भागेगा अँधेरा जब होगा इक्लाश अपना
insanon wala shahar
उम्मीद है बाकी तो मंजर भी आयेगा
नैतिकता पर हमारी पत्थर भी आयेगा
बच्चे की उम्मीद के देखो क्या कहने यारो
हमेशा कहता चाँद को छूकर ही आयेगा
नई दुनिया के दुश्मन हैं अमीर लोग
इनके पीछे जमाना किधर को जायेगा
पूंजी की हैवानियत साफ सामने आई
फिर से इंसानों वाला शहर वो आयेगा
Monday, June 3, 2013
utpadan gira
चौबीस माह में फैकट्री उत्पादन बढ़ने की
दर 7.4 फीसद से घटकर 2.6फीसद पर आ
गई । परेशान करने वाला पहलू यह है कि
उत्पादन सिर्फ मांग घटने से नहीं गिरा है ,
जिन क्षेत्रों में मांग है वहां भी उत्पादन गिर
रहा है ।
दैनिक भास्कर --3.6.13
दर 7.4 फीसद से घटकर 2.6फीसद पर आ
गई । परेशान करने वाला पहलू यह है कि
उत्पादन सिर्फ मांग घटने से नहीं गिरा है ,
जिन क्षेत्रों में मांग है वहां भी उत्पादन गिर
रहा है ।
दैनिक भास्कर --3.6.13
LUDHAK GAYA VIKAS
2010-2011 और 2012-2013 के दौरान दो साल में
विकास दर साढ़े नौ से पांच फीसद पर आ गयी ।
ग्रामीण भारत के शानदार निर्माण के दावों के विपरीत
चौबीस महीनों में कृषि विकास दर 5.4 फीसद से 1.4
फीसद पर लुढ़क गई ।
Saturday, June 1, 2013
niyativad
नियतिवाद
कार्य -कारण-निय्स्त में नियम -नियति - अवश्यंम भाविता - दुबक के बैठा हुआ है , जिससे नियतिवाद का प्रसव बिल्कुल आसानी से हो सकता है |
प्रकृति में कार्य - कारण- नियम हर जगह बराबर दिखाई पड़ता है | किन्तु इस तरह के कदे नियम को जब हम एक मनुष्य या अनेक मनुष्यों पर लागू करना चाहते हैं , तो भरी दिक्कत ही का सामना नहीं करना पड़ता ; बल्कि कितनी ही बार वह व्यक्ति या व्यक्ति -समूह उसे लागू होने नहीं देता ; यही वजह है, जो कि हम प्रकृति के बारे में जितने इत्मिनान के साथ भविष्य - कथन कर सकते हैं, मनुष्य के बारे में उतना नहीं कर सकते | आप इससे खुश न होईये -- अच्छा हुआ जो मनुष्य की ( इच्छा या कर्म में) स्वतंत्रता सुरक्षित राह गयी और वह नियति के पाश में बांधा "मदारी" का भालू नहीं बां गया | नियतिवाद और स्वतत्र्यवाद की समस्या काफी गहन है -- खासकर जबकि प्रकृति ( प्रयोग ) का सहारा छोड़ लोग इससे आकाश के सितारे तोड़ने लगते हैं |
हाँ तो प्रश्न है - जब प्रकृति में सर्वत्र करया - कारण -नियम व्यापा हुआ है ( इसे माने बिना कोई साइंस - संबंधी गवेषणा संभव नहीं ), तो मनुष्य को "स्वतंत्र कर्ता" कैसे कह सकते हैं ? कार्य - कारण - नियम एक जबरदस्त नियति ( भाग्य ) है , जिसके द्वारा विश्व की प्रत्येक वस्तु ( घटना प्रवाह )नियत है ; तभी तो हम प्रयोगशाला या वेधशाला में कार्य कारण तक पहुँचने का प्रयत्न करते हैं , अथवा कारण से कार्य के संभव होने का ख्याल करके उसके पाने के लिए परिश्रम करते हैं | फिर तो बेचारा मनुष्य हाथ- पैर से बांधा है , उसकी तो साँस भी इसी कार्य - कारण के अधीन है | इसका अर्थ दूसरे शब्दों में यह हुआ कि हमारी इच्छा , हमारे अंतस्तम विचार सभी नियति - भाग्य के हाथ में हैं | फिर तो यह मानना पड़ेगा कि विश्व के भीतर एक खास प्रयोजन छिपा मालूम देता है और उसका संचालक " ईश्वर" यह सब कुछ एक खास प्रयोजन से कर्ता है | किन्तु अभी इतनी दूर तक जाने की जरूरत नहीं , क्योंकि नियतिवाद दुधारी तलवार है, यदि वह मानव को हाथ पैर बांधकर छोड़ देगा तो "ईश्वर " की दशा भी उससे बेहतर न होगी वह भी नुयती के हाथ की कठपुतली मात्र रह जायेगा|
Tuesday, May 28, 2013
INKLAB
साथ तुम्हारा इन्कलाब नारा इस कदर भा गया
मकसद वीरान जिन्दगी का जैसे फिर से पा गया
मोम के घरों में बैठे लोग हमारे घर जलाने आये
जला दिए हमारे मग़र अपने भी ना बचा पाये
तबाह कर दिया जहान को मुनाफा हमें खा गया
रास्ता ही गल्त पकड़ा हमें भी उसी पर चलाया है
स्वर्ग नर्क के पचड़े में तुम्हीं ने हमको फंसाया है
भगवान और बाबाओं का खेल समझ में आ गया
आशा बाबू एक प्रवचन के कई लाख कमाते हैं
निर्मल बाबू नकली लोग पैसे दे कर के बुलाते हैं
भगवान की आड़ में मुनाफा दुनिया पर छा गया
जात गौत उंच नीच देश प्रदेश में दुनिया bantee
Sunday, May 26, 2013
paanch saal kee
मैं मैडीकल कालेज
मेरी यात्रा नहीं ज्यादा पुरानी
महज तेतालीस बरस की उम्र
१ ९ ६ ० --६ १ में सोचा गया रचा गया
कुछ लोगों ने मांग की
इतिहास इसका साक्षी है
विचारों द्वंदों संघर्षों के बीच
जनम हुआ है मेरा
करना शुरू किया मैंने अपना रूप धारण
धीरे धीरे मेरा वजूद सामने आया
मैंने आत्मसात किया
खुशियों और ग़मों को
जन जन के दुःख और सुख को
अनेक बार संकट झेले मगर
कदम आगे ही बढ़ते चले गए
बार बार मरीजों का हितेषी बना
कभी जन विरोधी रुख भी रहा
समय काल की सीमाओं में
मेरा विकास तय हुआ
राज्य के सामाजिक हालातों ने भी
मेरा विकास किया और
मेरी सीमायें तय की
लेकिन मेरा
केवल यही पक्ष नहीं
मैंने न्याय का साथ दिया
इलाज सीखा और सिखाया
कमजोरियों का पर्दा फाश किया
नए विचारों के बीज बोये और
कई बदलाओं ने जनम लिया
नयी खोज को पूरी लगन से
लोगों के दुःख दर्द उनकी पीड़ा को
मैंने दिल की धड़ कण बनाया
इस तरह मेरा
सामाजिक बोध विशाल बना
और मैं अधिक संवेदनशील हुआ
मैं मैडीकल कालेज
भविष्य की संभावनाएं दिखाता
जन जन को बीमारी से निजात दिलाता
मैं लोगों में ही रहता हूँ
उनके बिना मेरा कोई
वजूद ही नहीं है
मेरे रेजीडैन्ट डाक्टर
जी तोड़ मेहनत करते
सीनियर फैकल्टी भी ज्यां खपाती
पैरा मैडीकल के योगदान
इनकी तिल तिल की मेहनत से
पलता बढ़ता
इनकी संवेदनशीलता की नींव पर
इस तरह मैंने अपना रूप ग्रहण किया
मैं जन स्वास्थ्य का वाहक
लोगों के दिलों में बैठने का इच्छुक
अपने काम में जूटा रहता हूँ
चौबीस घंटे दिन और रात
मैं मैडीकल कालेज
जात धर्म उंच नीच के भेद लाँघ कर
हर समुदाय की सेवा को तत्पर
चलता गया सन १ ९ ७ ७ तक
एक दुर्घटना घटी और हमें बाँट गयी
फिर से साहस बटोरा मैंने
और जुट गया अपने काम में
बहुत से लोगों ने रोल मॉडल का
रोल निभाया
राष्ट्रीय मुक्ती आन्दोलन का प्रभाव
एक दौर तक नजर आया
डा इन्द्रजीत दीवान
डा प्रेम चंद्रा
डा विद्यासागर
डा जी एस सेखों
डा इंद्र बीर सिंह
डा पी एस मैनी
डा रमेश आर्य
और भी लम्बी फहरिस्त है
इनकी बदौलत मेरा कद
बढ़ा फिर भी
संतोष नहीं किया मैंने और रहा अग्रसर
दो कदम आगे एक कदम पीछे
और पहुँच गया नब्बे के दशक में
समय गुजरता गया
मैं भी चलता गया समय के साथ
दो हजार आठ दो जून को
मैंने हैल्थ यूनिवर्सिटी की
शक्ल अखित्यर की
या यूं कहें प्रश्व पीड़ा के बाद
मैं पैदा हो ही गई
आज मैं पांच बरस की हो गई
मेरे जनम के दौर में जब मैं
गर्भ में थी तब लोगों में
मौजूद शंकाओं और रूढ़ियों के
बावजूद मैंने जनम लिया और
अपना विकास किया
पूरे हिंदुस्तान में इस नन्ही
गुडिया ने अपनी पहचान बनाई
मानवीय मूल्यों के उत्कर्ष तक
पहुंचे यहाँ कार्यरत लोग
पूरे हरियाणा में एक पहचान बनी
आहिस्ता आहिस्ता एक शकल ली
मैंने अपने पंख फैलाये
खेल कूद में मन लगाया
सास्कृतिक धरातल पर भी
विकास किया मैंने
समाज के बहुत ही विरोधाभाषी
माहौल में लोगों की आवा जाही
के बीच कभी धीमे तो कभी तेज
मैंने मैडीकल शिक्षा रीसर्च और
मरीज सेवा में कदम बढ़ाये
मुझे मालूम है कई कमियां है
मुझ में कई कमजोरियां हैं मेरी
कई खामियां हैं
कई का पूरा समाज जिम्मेवार
कई की सरकार जिम्मेवार
कई के हम खुद जिम्मेवार
कमियों और कमजोरियों को
पहचानते हुए हम नए आस्मां
की तरफ आगे बढ़ रहे
नया ओपी डी बलॉक
नया मेंटल होस्पीटल
नया ऑडी टो रियम
नया सुपर स्पैसिलिटी बलॉक
यह सब दिखा रहे हैं जरूरतों
के प्रति प्रतिबधता
आगे बढ़ना है अभी और मुझे
आप सब की मदद से \और
सरकार की उदारता पर
उम्मीद है की हम सब मिलकर
लालच तुच्छ स्वर्थों से ऊपर
उठकर
कली भेड़ों को अलग थलग
करके
सच्ची मेहनत व् लगन के साथ
और ऊंचाईयों को छू लेंगे हम
पांच साल की बची को जो
२ ० ० ८ में पैदा हुई आज २ ० १ ३ में
पहुँच गयी
सुरक्षित रखना जनता की
जिम्मेदारी है ॥।
मेरी यात्रा नहीं ज्यादा पुरानी
महज तेतालीस बरस की उम्र
१ ९ ६ ० --६ १ में सोचा गया रचा गया
कुछ लोगों ने मांग की
इतिहास इसका साक्षी है
विचारों द्वंदों संघर्षों के बीच
जनम हुआ है मेरा
करना शुरू किया मैंने अपना रूप धारण
धीरे धीरे मेरा वजूद सामने आया
मैंने आत्मसात किया
खुशियों और ग़मों को
जन जन के दुःख और सुख को
अनेक बार संकट झेले मगर
कदम आगे ही बढ़ते चले गए
बार बार मरीजों का हितेषी बना
कभी जन विरोधी रुख भी रहा
समय काल की सीमाओं में
मेरा विकास तय हुआ
राज्य के सामाजिक हालातों ने भी
मेरा विकास किया और
मेरी सीमायें तय की
लेकिन मेरा
केवल यही पक्ष नहीं
मैंने न्याय का साथ दिया
इलाज सीखा और सिखाया
कमजोरियों का पर्दा फाश किया
नए विचारों के बीज बोये और
कई बदलाओं ने जनम लिया
नयी खोज को पूरी लगन से
लोगों के दुःख दर्द उनकी पीड़ा को
मैंने दिल की धड़ कण बनाया
इस तरह मेरा
सामाजिक बोध विशाल बना
और मैं अधिक संवेदनशील हुआ
मैं मैडीकल कालेज
भविष्य की संभावनाएं दिखाता
जन जन को बीमारी से निजात दिलाता
मैं लोगों में ही रहता हूँ
उनके बिना मेरा कोई
वजूद ही नहीं है
मेरे रेजीडैन्ट डाक्टर
जी तोड़ मेहनत करते
सीनियर फैकल्टी भी ज्यां खपाती
पैरा मैडीकल के योगदान
इनकी तिल तिल की मेहनत से
पलता बढ़ता
इनकी संवेदनशीलता की नींव पर
इस तरह मैंने अपना रूप ग्रहण किया
मैं जन स्वास्थ्य का वाहक
लोगों के दिलों में बैठने का इच्छुक
अपने काम में जूटा रहता हूँ
चौबीस घंटे दिन और रात
मैं मैडीकल कालेज
जात धर्म उंच नीच के भेद लाँघ कर
हर समुदाय की सेवा को तत्पर
चलता गया सन १ ९ ७ ७ तक
एक दुर्घटना घटी और हमें बाँट गयी
फिर से साहस बटोरा मैंने
और जुट गया अपने काम में
बहुत से लोगों ने रोल मॉडल का
रोल निभाया
राष्ट्रीय मुक्ती आन्दोलन का प्रभाव
एक दौर तक नजर आया
डा इन्द्रजीत दीवान
डा प्रेम चंद्रा
डा विद्यासागर
डा जी एस सेखों
डा इंद्र बीर सिंह
डा पी एस मैनी
डा रमेश आर्य
और भी लम्बी फहरिस्त है
इनकी बदौलत मेरा कद
बढ़ा फिर भी
संतोष नहीं किया मैंने और रहा अग्रसर
दो कदम आगे एक कदम पीछे
और पहुँच गया नब्बे के दशक में
समय गुजरता गया
मैं भी चलता गया समय के साथ
दो हजार आठ दो जून को
मैंने हैल्थ यूनिवर्सिटी की
शक्ल अखित्यर की
या यूं कहें प्रश्व पीड़ा के बाद
मैं पैदा हो ही गई
आज मैं पांच बरस की हो गई
मेरे जनम के दौर में जब मैं
गर्भ में थी तब लोगों में
मौजूद शंकाओं और रूढ़ियों के
बावजूद मैंने जनम लिया और
अपना विकास किया
पूरे हिंदुस्तान में इस नन्ही
गुडिया ने अपनी पहचान बनाई
मानवीय मूल्यों के उत्कर्ष तक
पहुंचे यहाँ कार्यरत लोग
पूरे हरियाणा में एक पहचान बनी
आहिस्ता आहिस्ता एक शकल ली
मैंने अपने पंख फैलाये
खेल कूद में मन लगाया
सास्कृतिक धरातल पर भी
विकास किया मैंने
समाज के बहुत ही विरोधाभाषी
माहौल में लोगों की आवा जाही
के बीच कभी धीमे तो कभी तेज
मैंने मैडीकल शिक्षा रीसर्च और
मरीज सेवा में कदम बढ़ाये
मुझे मालूम है कई कमियां है
मुझ में कई कमजोरियां हैं मेरी
कई खामियां हैं
कई का पूरा समाज जिम्मेवार
कई की सरकार जिम्मेवार
कई के हम खुद जिम्मेवार
कमियों और कमजोरियों को
पहचानते हुए हम नए आस्मां
की तरफ आगे बढ़ रहे
नया ओपी डी बलॉक
नया मेंटल होस्पीटल
नया ऑडी टो रियम
नया सुपर स्पैसिलिटी बलॉक
यह सब दिखा रहे हैं जरूरतों
के प्रति प्रतिबधता
आगे बढ़ना है अभी और मुझे
आप सब की मदद से \और
सरकार की उदारता पर
उम्मीद है की हम सब मिलकर
लालच तुच्छ स्वर्थों से ऊपर
उठकर
कली भेड़ों को अलग थलग
करके
सच्ची मेहनत व् लगन के साथ
और ऊंचाईयों को छू लेंगे हम
पांच साल की बची को जो
२ ० ० ८ में पैदा हुई आज २ ० १ ३ में
पहुँच गयी
सुरक्षित रखना जनता की
जिम्मेदारी है ॥।
हरियाणा का समाज
हरियाणा का समाज
हरियाणा के समाज ने मान लिया कि
हरित क्रांति लाकर कि
अच्छी फसलें उगाकर कि
उद्योगों का बेइंतिहा विकास करके
हम प्रगति शील बन जायेंगे
हरियाणा नंबर वन होगा
मगर अफ़सोस !
यह नहीं हो सका
समाज में बुराईयाँ बढ़ती गई
आज हरियाणा का समाज
बेटियों का हत्यारा बन गया
हरा भरा हरियाणा जहाँ
दूध दही का खाना मगर
गर्भवती महिला में अनीमिया
दस प्रतिशत बढ़ जाना
हमारे समाज में
कमजोर होती संवेदनशीलता
मानवीय मूल्यों का पतन
ईस्मा ईला बोहर जैसे कुख्यात
गाओं का उदय
सामाजिक न्याय और समानता
का कमजोर होता अहसास
महिला उत्पीडन का बढ़ना
दलित दमन के कई जगह विस्फोट
वैज्ञानिक नजर व् अच्छे साहित्य
की अनुपस्तिथि का परिचय दे रहे हैं
इस समाज का ताना बाना टूट रहा है
युवा पीढी भटक रही है
सही रास्ता दिखने में राजनीति
सक्षम नहीं हो रही है
नशा फ्री सेक्स और मौज मजा
किसी भी कीमत पर
यह शार्ट कट अपना लिया
युवा नौजवानों ने
यह समाज गोत्र गाँव और
जात पात की एकता में
रास्ता तलशता है
या कभी पुरानी परंपराओँ की
तरफ मुड़ना चाहता है
नए पुराने की अच्छाई को
आत्मसात करके अपने
विवेक को निखर नहीं पा रहा है
समाज की इस स्थिति का
एक कारन वैज्ञानिक
नजर की अनुपस्थिति है
साथ ही अच्छे साहित्य की कमी
आज हरियाणा के समाज को शार्ट कट
से हटकर अपने हित के लिए अच्छे
साहित्य की लम्बी और दुर्गम यात्राओं
से जुड़ना ही होगा
रूढ़ीवाद और परिवारवाद को
त्याग कर विवेक और
वैज्ञानिक नजर को अंगीकार
करना ही होगा
समाज में न्याय चेतना का निखार
मानवीय मूल्यों का प्रवाह
नागरिक अधिकारों का सम्मान
सामाजिक रिश्तों में बेहतरी तथा
चिंतनशील संवेदनशील पुख्ता
सामाजिक ढांचों का विकास करने में
साहित्य और विवेक की
अहम् भूमिका रही है
इतिहास इसका गवाह है
हरियाणा के समाज ने मान लिया कि
हरित क्रांति लाकर कि
अच्छी फसलें उगाकर कि
उद्योगों का बेइंतिहा विकास करके
हम प्रगति शील बन जायेंगे
हरियाणा नंबर वन होगा
मगर अफ़सोस !
यह नहीं हो सका
समाज में बुराईयाँ बढ़ती गई
आज हरियाणा का समाज
बेटियों का हत्यारा बन गया
हरा भरा हरियाणा जहाँ
दूध दही का खाना मगर
गर्भवती महिला में अनीमिया
दस प्रतिशत बढ़ जाना
हमारे समाज में
कमजोर होती संवेदनशीलता
मानवीय मूल्यों का पतन
ईस्मा ईला बोहर जैसे कुख्यात
गाओं का उदय
सामाजिक न्याय और समानता
का कमजोर होता अहसास
महिला उत्पीडन का बढ़ना
दलित दमन के कई जगह विस्फोट
वैज्ञानिक नजर व् अच्छे साहित्य
की अनुपस्तिथि का परिचय दे रहे हैं
इस समाज का ताना बाना टूट रहा है
युवा पीढी भटक रही है
सही रास्ता दिखने में राजनीति
सक्षम नहीं हो रही है
नशा फ्री सेक्स और मौज मजा
किसी भी कीमत पर
यह शार्ट कट अपना लिया
युवा नौजवानों ने
यह समाज गोत्र गाँव और
जात पात की एकता में
रास्ता तलशता है
या कभी पुरानी परंपराओँ की
तरफ मुड़ना चाहता है
नए पुराने की अच्छाई को
आत्मसात करके अपने
विवेक को निखर नहीं पा रहा है
समाज की इस स्थिति का
एक कारन वैज्ञानिक
नजर की अनुपस्थिति है
साथ ही अच्छे साहित्य की कमी
आज हरियाणा के समाज को शार्ट कट
से हटकर अपने हित के लिए अच्छे
साहित्य की लम्बी और दुर्गम यात्राओं
से जुड़ना ही होगा
रूढ़ीवाद और परिवारवाद को
त्याग कर विवेक और
वैज्ञानिक नजर को अंगीकार
करना ही होगा
समाज में न्याय चेतना का निखार
मानवीय मूल्यों का प्रवाह
नागरिक अधिकारों का सम्मान
सामाजिक रिश्तों में बेहतरी तथा
चिंतनशील संवेदनशील पुख्ता
सामाजिक ढांचों का विकास करने में
साहित्य और विवेक की
अहम् भूमिका रही है
इतिहास इसका गवाह है
Monday, May 20, 2013
हमेशा रहने वाला
शुभा की कविता
हमेशा रहने वाला
लव मार्किट
और लव गुरु की दुनिया के बाहर
प्रेम न तो बिक रहा है
न डर रहा है
कभी - कभी लगता ज़रूर है
जैसे बाज़ार सर्वशातिमान है
पर उसके तो घुटने
घसक जाते हैं
बार - बार
इन प्रेमियों को देख कर
यह लगता है
न जाति सर्वशातिमान है
न बेईमानी
बार - बार इन पर फतवे जारी किये जाते हैं
इनके कुचले गए शरीर
मिलते हैं जहाँ - तहां
फाँसी के फंदे
सलफास .....
हत्या के कितने ही तरीके
इन पर आजमाए जाते हैं
पर ये हर दिन
मर्ज़ी से प्रेम करने का
रास्ता लेते हैं
लगता है यही हमेशा
रहने वाले हैं
-----------------
सोच सोच कर
सोच सोच कर घबरा जाता हूँ मैं
अपने आप को अकेला पाता हूँ मैं
एक नयी दुनिया का सपना मेरा है
यहाँ क्या मेरा है और क्या तेरा है
इंसानियत पैदा की है समाज ने
हैवानियत पैदा की है दगा बाज ने
हैवानियत ख़त्म हो है यही सपना
इंसानियत बढे यही लक्ष्य अपना
मनकी शान्ति की खोज में धर्मात्मा
खोजते खोजते खोज लिया परमात्मा
अपनी शान्ति पाई हमारी लूट पर
हमारी शांति भगवन की छूट पर
भगवान भी इंसान की खोज कहते
हम तो भुगतें वो करते मौज रहते
जिस दिन ये चालबाजी भगवान की
समझ आयेगी तो मुक्ति इन्सान की
सोचता हूँ जितना उतना ही भगवान
नजर आता है मुझको तो बस शैतान
मेरे लिए तो मेहन त इमानदारी
उनको लूट की दी उसने थानेदारी
सबसे पहले होगी बगावत मेरी
सामने लायेगी उसकी हेरा फेरी
जग नहीं है सोता उसकी हाँ के बिना
घोटाला कैसे होता उसकी हाँ के बिना
मंदिरों में हजारों टन सोना जमा है
यहाँ भूख से मौतों का लगा मजमा है
लोगो ने चढ़ावा चढ़ाया है मंदिरों में
चढ़ावे तेन मौज उड़ाया है मंदिरों में
महिला को दासी बनाया है मंदिरों में
गरीबों को गया भरमाया है मंदिरों में
मन की शांति नहीं मिली है मंदिरों में
इंसानियत आज हिली है मन्दिरों में
बुद्ध ने नया रास्ता खोजा मन शांति का
भगवान को नाकारा दर तोडा भ्रान्ति का
मार्क्स ने धर्म को अफीम बताया था
गरीब किया आदि हमें समझाया था
पूंजी का खेल सारा है पूंजीवाद में
इसका जवाब तो है समाजवाद में
सोचता समाजवाद कैसा हो आज का
क्या रिश्ता होगा चिड़िया और बाज का
कई सवाल हैं जिनके ढूँढने जवाब
महात्मा ने नहीं हमें ढूँढने जनाब
रंग भरने हैं समाजवादी समाज में
सब की हिस्सेदारी के सही अंदाज में
"रणबीर "
अपने आप को अकेला पाता हूँ मैं
एक नयी दुनिया का सपना मेरा है
यहाँ क्या मेरा है और क्या तेरा है
इंसानियत पैदा की है समाज ने
हैवानियत पैदा की है दगा बाज ने
हैवानियत ख़त्म हो है यही सपना
इंसानियत बढे यही लक्ष्य अपना
मनकी शान्ति की खोज में धर्मात्मा
खोजते खोजते खोज लिया परमात्मा
अपनी शान्ति पाई हमारी लूट पर
हमारी शांति भगवन की छूट पर
भगवान भी इंसान की खोज कहते
हम तो भुगतें वो करते मौज रहते
जिस दिन ये चालबाजी भगवान की
समझ आयेगी तो मुक्ति इन्सान की
सोचता हूँ जितना उतना ही भगवान
नजर आता है मुझको तो बस शैतान
मेरे लिए तो मेहन त इमानदारी
उनको लूट की दी उसने थानेदारी
सबसे पहले होगी बगावत मेरी
सामने लायेगी उसकी हेरा फेरी
जग नहीं है सोता उसकी हाँ के बिना
घोटाला कैसे होता उसकी हाँ के बिना
मंदिरों में हजारों टन सोना जमा है
यहाँ भूख से मौतों का लगा मजमा है
लोगो ने चढ़ावा चढ़ाया है मंदिरों में
चढ़ावे तेन मौज उड़ाया है मंदिरों में
महिला को दासी बनाया है मंदिरों में
गरीबों को गया भरमाया है मंदिरों में
मन की शांति नहीं मिली है मंदिरों में
इंसानियत आज हिली है मन्दिरों में
बुद्ध ने नया रास्ता खोजा मन शांति का
भगवान को नाकारा दर तोडा भ्रान्ति का
मार्क्स ने धर्म को अफीम बताया था
गरीब किया आदि हमें समझाया था
पूंजी का खेल सारा है पूंजीवाद में
इसका जवाब तो है समाजवाद में
सोचता समाजवाद कैसा हो आज का
क्या रिश्ता होगा चिड़िया और बाज का
कई सवाल हैं जिनके ढूँढने जवाब
महात्मा ने नहीं हमें ढूँढने जनाब
रंग भरने हैं समाजवादी समाज में
सब की हिस्सेदारी के सही अंदाज में
"रणबीर "
Saturday, May 11, 2013
pyar
वायदे करके इनको पूरी तरह हमने निभाया है
करके वायदे तोड़ दिए ये तुमने करके दिखाया है
चलो कोई मजबूरी होगी वायदे नहीं निभा पाये
प्यार तो तुम्हें हमसे था ही छिप नहीं पाया है
अपराध बोध नहीं हमको क्यूं तुमसे प्यार किया
हमने तहे दिल से बिना किसी झिझक निभाया है
Friday, May 10, 2013
आसाराम बापू
आसाराम बापू
अक्टूबर 2008 तक मिली जानकारी के अनुसार आसाराम बापू के आश्रमों की कीमत 4500 करोड़ रूपये से अधिक है । जाहिर है कि अब तक तो बापू दस हजार करोड़ से ज्यादा की संपत्ति के मालिक हो चुके होंगे । बापू जी की काली करतूतों के बारे में इंटरनेट पर जितनी जानकारी उपलब्ध है , शायद ही किसी दुसरे बाबा के बारे में मिलती हो । बाबा के देशभर में फैले लगभग सारे आश्रम विवादित हैं । गरीबों और किसानों की भूमि पर जबरिया कब्ज़ा करके बनाये गए हैं । इस मायने में यह तथाकथित अध्यातम गुरु सबसे बड़ा भूमाफिया है । बापू के आश्रमों के पीछे की कहानी कुछ इस तरह से है :
1. राजधानी दिल्ली में ही सीलपुर में बाबा ने अपना आश्रम मंदिर पर कब्ज़ा कर बनाया है । करोल बाग़ में बाबा का मंदिर वन भूमि पर है । दिल्ली में ही राजोकरी का आश्रम भी इसी प्रकार बना है । नजफगढ़ का मंदिर तो ग्राम पंचायत की भूमि पर बनाया गया है । -------जारी है
2. ऋषिकेश में बापू का आश्रम किसानों की भूमि पर बनाया गया है । ग्वालियर में शिवपुरी रोड पर बापू का आश्रम गाँव की चरनोई भूमि पर है । मामला अदालत में है । छिंदवाडा में बापू का आश्रम आदिवासियों की जमीन पर कब्ज़ा करके बनाया गया है। मामला अदालत में है । मेघनगर में 108 एकड़ में बने बापू के आश्रम की भूमि के असली मालिक आदिवासी हैं । यह बात अदालत मान चुकी है । \
3. रतलाम में तो बापू ने पूरे 500 एकड़ भूमि पर कब्ज़ा कर आश्रम खड़ा किया है । इस भूमि की असली मालिक बापू की ही भगतिन प्रेमा बहन है , जो मुंबई में रहती है ।
4. गुजरात में पेथ्माला में बापू का आश्रम जिस भूमि पर बना है , उसकी बाजार कीमत 350 करोड़ से अधिक है । यह भूमि गाँव के किसानों की है ।
5. चंडीगढ़ में तो बापू ने बड़ा धोखा किया , बापू के आश्रम का उद्घाटन प्रकाश सिंह बदल ने किया । बापू ने अपने भगतों से कहा कि वह पञ्च पञ्च लाख में उन्हें फ़्लैट बनाकर देगा । इस प्रकार 500 करोड़ अपनी जेब में भरे और चलते बने । लोग लम्बे समय तक घर का सपना देखने के बाद अब अदालत के दरवाजे के बहार खड़े हैं ।
6. बनारस में भी बापू के आश्रम की भूमि का मामला अदालत में चल रहा है । लखनऊ में बापू का आश्रम जिस भूमि पर बना है , पुलिस की मदद से बापू ने इसके मालिक को गिरफ्तार करवा कर उक्त भूमि पर कब्ज़ा कर , भव्य भवन निर्माण करवाया । मामला अभी अदालत में है । सूरत में बापू के आश्रम की दीवारें खून से रंगी हुई हैं । बापू ने यह आश्रम भूमि मालिक की हत्या करवा कर बनाया है । अहमदाबाद में भी बापू के आश्रम की भूमि का मुकदमा कोर्ट में चल रहा है । भावनगर में बापू के आश्रम के अतिक्रमण को सितम्बर 2008 में नगर निगम ने तोडा है। हरिद्वार में आसा राम ने जिस भूमि पर अपना आश्रम बनाया है , वह कालीपुर गाँव की है । हिम्मतनगर नगर में आश्रम की भूमि ग्राम पंचायत की भूमि है ।
बापू प्रवचनों के नाम पर व्यापर करते हैं । वे जहाँ प्रवचन देते हैं उसका टैंट , माइक भी अपने साथ ही लेट हैं । उसका पैसा अलग से वसूलते हैं । खुद को भगवन कहने वाले बापू को व्यापर से इतना प्यार है कि अपने अयॊजन के आसपास किसी दूसरी धर्मिक पुस्तक तक को बिकने की इजाजत नहीं देते। आश्रम की पुस्तकें बिकेंगी । दवाएं मंजन और अगर्बतियाँ तक वही बिकेंगी जो बापू के अपने उत्पाद हों ।
अक्टूबर 2008 तक मिली जानकारी के अनुसार आसाराम बापू के आश्रमों की कीमत 4500 करोड़ रूपये से अधिक है । जाहिर है कि अब तक तो बापू दस हजार करोड़ से ज्यादा की संपत्ति के मालिक हो चुके होंगे । बापू जी की काली करतूतों के बारे में इंटरनेट पर जितनी जानकारी उपलब्ध है , शायद ही किसी दुसरे बाबा के बारे में मिलती हो । बाबा के देशभर में फैले लगभग सारे आश्रम विवादित हैं । गरीबों और किसानों की भूमि पर जबरिया कब्ज़ा करके बनाये गए हैं । इस मायने में यह तथाकथित अध्यातम गुरु सबसे बड़ा भूमाफिया है । बापू के आश्रमों के पीछे की कहानी कुछ इस तरह से है :
1. राजधानी दिल्ली में ही सीलपुर में बाबा ने अपना आश्रम मंदिर पर कब्ज़ा कर बनाया है । करोल बाग़ में बाबा का मंदिर वन भूमि पर है । दिल्ली में ही राजोकरी का आश्रम भी इसी प्रकार बना है । नजफगढ़ का मंदिर तो ग्राम पंचायत की भूमि पर बनाया गया है । -------जारी है
2. ऋषिकेश में बापू का आश्रम किसानों की भूमि पर बनाया गया है । ग्वालियर में शिवपुरी रोड पर बापू का आश्रम गाँव की चरनोई भूमि पर है । मामला अदालत में है । छिंदवाडा में बापू का आश्रम आदिवासियों की जमीन पर कब्ज़ा करके बनाया गया है। मामला अदालत में है । मेघनगर में 108 एकड़ में बने बापू के आश्रम की भूमि के असली मालिक आदिवासी हैं । यह बात अदालत मान चुकी है । \
3. रतलाम में तो बापू ने पूरे 500 एकड़ भूमि पर कब्ज़ा कर आश्रम खड़ा किया है । इस भूमि की असली मालिक बापू की ही भगतिन प्रेमा बहन है , जो मुंबई में रहती है ।
4. गुजरात में पेथ्माला में बापू का आश्रम जिस भूमि पर बना है , उसकी बाजार कीमत 350 करोड़ से अधिक है । यह भूमि गाँव के किसानों की है ।
5. चंडीगढ़ में तो बापू ने बड़ा धोखा किया , बापू के आश्रम का उद्घाटन प्रकाश सिंह बदल ने किया । बापू ने अपने भगतों से कहा कि वह पञ्च पञ्च लाख में उन्हें फ़्लैट बनाकर देगा । इस प्रकार 500 करोड़ अपनी जेब में भरे और चलते बने । लोग लम्बे समय तक घर का सपना देखने के बाद अब अदालत के दरवाजे के बहार खड़े हैं ।
6. बनारस में भी बापू के आश्रम की भूमि का मामला अदालत में चल रहा है । लखनऊ में बापू का आश्रम जिस भूमि पर बना है , पुलिस की मदद से बापू ने इसके मालिक को गिरफ्तार करवा कर उक्त भूमि पर कब्ज़ा कर , भव्य भवन निर्माण करवाया । मामला अभी अदालत में है । सूरत में बापू के आश्रम की दीवारें खून से रंगी हुई हैं । बापू ने यह आश्रम भूमि मालिक की हत्या करवा कर बनाया है । अहमदाबाद में भी बापू के आश्रम की भूमि का मुकदमा कोर्ट में चल रहा है । भावनगर में बापू के आश्रम के अतिक्रमण को सितम्बर 2008 में नगर निगम ने तोडा है। हरिद्वार में आसा राम ने जिस भूमि पर अपना आश्रम बनाया है , वह कालीपुर गाँव की है । हिम्मतनगर नगर में आश्रम की भूमि ग्राम पंचायत की भूमि है ।
बापू प्रवचनों के नाम पर व्यापर करते हैं । वे जहाँ प्रवचन देते हैं उसका टैंट , माइक भी अपने साथ ही लेट हैं । उसका पैसा अलग से वसूलते हैं । खुद को भगवन कहने वाले बापू को व्यापर से इतना प्यार है कि अपने अयॊजन के आसपास किसी दूसरी धर्मिक पुस्तक तक को बिकने की इजाजत नहीं देते। आश्रम की पुस्तकें बिकेंगी । दवाएं मंजन और अगर्बतियाँ तक वही बिकेंगी जो बापू के अपने उत्पाद हों ।
YOUTH
एक तरफ बेरोजगारी की मार है और दूसरी तरफ अंध उपभोग की लंपट संस्कृति का अंधाधुंध प्रचार है इनके बीच में घिरे ये युवक युवती लंपटीकरण का शिकार तेजी से होते जा रहे हैं !स्थगित रचनात्मक उर्जा से भरे युवाओं को हफ्ता वसूली ]नशा खोरी ]अपराध और दलाली के फलते फूलते कारोबार अपनी तरफ खींच रहे हैं। हम बैठे उनको कोसते रहते हैं मगर कोई सकारात्मक एजेंडा नहीं दे पा रहे हैं युवाओं को ।
Thursday, May 9, 2013
इंसानियत
वक्त बहुत मुस्किल लगता है मुझको
रोशनी कहाँ अँधेरा दिखता है मुझको
विकास रास्ता अमेरिका का जापान का
वही रास्ता नहीं हो सकता हिंदुस्तान का
अमेरिका ने दुनिया पे लंगोट घुमाया
सेना पेंटागन के दम पे इराक दबाया
मंदिर मस्जिद के चक्कर में बहकाए
जाट गोत पर बहोत से क़त्ल करवाए
घोटाले पर घोटाले गरीब का गल घोटा
मंदी में भी अमीर मुनाफा कमाया मोटा
लूटने वाले महज पांच ही बतलाते हैं
पिचानवे इनसे क्यूं इतना घबराते हैं
पिचानवे और पांच का समझो हिसाब
लिखी गयी ढूंढो इस पर जो किताब
वर्ग संघर्ष अमीर उप्पर से चला रहे
हथ कंडे हर तरह के आज अपना रहे
डेमोक्रेसी का लबादा हुक्म ये बजाते हैं
बोले जो उनके सामने भेज सेना दबाते हैं
पूरी दुनिया अमेरिका के निशाने पे है
दुनिया को ग्लोबल विलेज बनाने को है
असमानता बढ़ेगी लूट मार भी बढ़ेगी
नतमस्तक हो सरकार चालिसे पढेगी
दुनिया की पूंजी पर अमेरिका छाएगा
संस्कृति बना हथियार गुलाम बनाएगा
बाबा रामदेव जी हमको योग सिखायेंगे
अन्दर अन्दर हाथ मेरिका से मिलायेंगे
आशा बाबू रोज गालियाँ देते हैं विज्ञानं को
क्या कहे बाबा जी के विज्ञानं के अज्ञान को
गणेश मूर्ती लाखों टन दूध पी जाती है
दुनिया में इस कारन भारत की ख्याति है
जातियां हजारों हजार इस देश में बसती
नेताओं के इशारे पे एक दूजे से खसती
विविधता देश की वास्तव में ये पहचान
दुनिया में छा सकता देके सबको सम्मान
सांझी विरासत हमारी बहुत पुरानी देखो
गंगा जमुनी संस्कृति सबसे निराली देखो
सांझी विरासत को हमें आगे बढ़ाना है
जात पात छोड़ इंसानियत को अपनाना है
रणबीर
रोशनी कहाँ अँधेरा दिखता है मुझको
विकास रास्ता अमेरिका का जापान का
वही रास्ता नहीं हो सकता हिंदुस्तान का
अमेरिका ने दुनिया पे लंगोट घुमाया
सेना पेंटागन के दम पे इराक दबाया
मंदिर मस्जिद के चक्कर में बहकाए
जाट गोत पर बहोत से क़त्ल करवाए
घोटाले पर घोटाले गरीब का गल घोटा
मंदी में भी अमीर मुनाफा कमाया मोटा
लूटने वाले महज पांच ही बतलाते हैं
पिचानवे इनसे क्यूं इतना घबराते हैं
पिचानवे और पांच का समझो हिसाब
लिखी गयी ढूंढो इस पर जो किताब
वर्ग संघर्ष अमीर उप्पर से चला रहे
हथ कंडे हर तरह के आज अपना रहे
डेमोक्रेसी का लबादा हुक्म ये बजाते हैं
बोले जो उनके सामने भेज सेना दबाते हैं
पूरी दुनिया अमेरिका के निशाने पे है
दुनिया को ग्लोबल विलेज बनाने को है
असमानता बढ़ेगी लूट मार भी बढ़ेगी
नतमस्तक हो सरकार चालिसे पढेगी
दुनिया की पूंजी पर अमेरिका छाएगा
संस्कृति बना हथियार गुलाम बनाएगा
बाबा रामदेव जी हमको योग सिखायेंगे
अन्दर अन्दर हाथ मेरिका से मिलायेंगे
आशा बाबू रोज गालियाँ देते हैं विज्ञानं को
क्या कहे बाबा जी के विज्ञानं के अज्ञान को
गणेश मूर्ती लाखों टन दूध पी जाती है
दुनिया में इस कारन भारत की ख्याति है
जातियां हजारों हजार इस देश में बसती
नेताओं के इशारे पे एक दूजे से खसती
विविधता देश की वास्तव में ये पहचान
दुनिया में छा सकता देके सबको सम्मान
सांझी विरासत हमारी बहुत पुरानी देखो
गंगा जमुनी संस्कृति सबसे निराली देखो
सांझी विरासत को हमें आगे बढ़ाना है
जात पात छोड़ इंसानियत को अपनाना है
रणबीर
Mahila
महिला और हरियाणा में विकास के नए प्रतिमान --- पूर्व जन्म छांटकर महिला भ्रूण हत्या .
हरियाणा में गैंग रेप , रेप , छेड़छाड़ ,लापता लड़कियों और महिलाओं का मुद्दा एक खतरनाक स्तर तक चला गया है और गहराई से सिंहावलोकन की एक गंभीर इसलिए जरूरत है कि कुछ ठोस उपायों के बारे में सोचा जा सकता है. उपभोक्तावादी उन्मुख आर्थिक विकास, चिकित्सा और हमारे समाज में तथा डॉक्टर पेशे में लिंग भेद व पुत्र लालसा के व्यावसायीकरण, सामाजिक असुरक्षा का बढ़ना ,एक साथ इन सबने मिलकर एक दुखद व गम्भीर स्थिति पैदा की है लड़कियों के लापता होने के सदर्भ में '. लिंग अनुपात की ग्लोबल स्तर पर तुलना से पता चलता है कि यूरोप, उत्तरी अमेरिका, कैरिबियन, मध्य एशिया, लिंग अनुपात में उप सहारा अफ्रीका के सबसे गरीब क्षेत्रों इन देशों में महिला भ्रूण हत्या या / उपेक्षा ने ही लड़कियों को दोयम दर्ज दिया व बेटों को पैदा करने के लिए नयी प्रजनन प्रौद्योगिकी का उपयोग किया गया तथा यह सब एक रूप से औरत के लिए अनुकूल हैं . दूसरी ओर सबसे कम लिंग अनुपात भारत के कुछ भागों में पाया जाता है और हरियाणा उनमें से एक है. 0-6 साल में नीचे से कम के 10 जिलों में लिंग अनुपात के जिलों में 3 हरियाणा -- कुरुक्षेत्र-770, -783 सोनीपत , 784, अम्बाला हैं। .ऐसा व्यवहार पहले भी नजर आया लेकिन अब इसके साथ एक नया मोड़ आया है व्यापक प्रसार के साधनों के चलते और हरियाणा में नई प्रौद्योगिकियों के प्रयोग के चलते और हरित क्रांति की अवधि के बाद ई एक हिस्से की सम्पन्नता ने एक खास हालत पैदा किये हैं । वांछनीय और अवांछित की परिधारना विकसित हुई है जिस के चयन के सिद्धांत पर आधारित हैं. हरियाणा में वांछनीय "बच्चा लड़का है" और अवांछित "बच्ची" है और परिणाम स्पष्ट है. 2001 की जनगणना के परिणाम से पता चला है कि 927 लड़कियों के 1000 लड़कों के लिए लिंग अनुपात के साथ, भारत में 0-6 वर्ष के आयु वर्ग में 60 लाख लड़कियों का घाटा था, जब भारत ने नई सहस्राब्दी में प्रवेश किया. हरियाणा में हम 2001 की जनगणना के अनुसार 0-6 वर्ष के आयु समूह में 1,36,883 लड़कियों की कमी है. इन NRT महिला प्रजनन और वाणिज्यिक हितों से अधिक पितृसत्तात्मक नियंत्रण के संदर्भ में है रहे हैं महिलाओं की गरिमा और शारीरिक अखंडता के लिए बड़ा खतरा. दो बच्चे आदर्श नीति भी एक नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न किया है महिलाओं की पूर्व जन्म उन्मूलन के समर्थकों के आगे रख जैसे विभिन्न तर्क 'वेतन 500 रुपए और अब 5 रु, 00,000 बाद में बचाने के लिए' और 'महिलाओं के विकल्प "महिलाओं के विकल्प के रूप में अगर बना रहे हैं. शून्य में नहीं है और ठोस समाज में. गर्भपात जैसे विरोध किया जा रहा है. यह भी स्पष्ट किया कि गर्भपात करने का अधिकार महिलाओं का एक अनिवार्य ठीक है, एक तरह से अपने जीवन, अपने शरीर और प्रजनन क्षमता का निर्धारण अधिकार के रूप में रहना चाहिए की जरूरत है.
इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है और महत्वपूर्ण सवाल हम हरियाणवी लड़कियों एक लुप्तप्राय प्रजातियों बन करने की अनुमति सकता है? निश्चित रूप से "नहीं".
डा. साबू जॉर्ज अपने आप को और रोहतक जिला (विभाजन से पहले) में लगभग 13,000 की ग्रामीण आबादी में ग्रामीण हरियाणा में कन्या भ्रूण हत्या पर एक अध्ययन किया है और हम 1000 से भी अधिक महिलाओं साक्षात्कार करने के लिए गर्भावस्था परिणाम पता 1995 के लिए 2000.We के दौरान पाया गया कि 'संस केवल' और 'सन्स अवश्य सिंड्रोम "कर दिया गया है कन्या भ्रूण हत्या का सहारा, आधुनिक तकनीकी उपकरणों का उपयोग करके, इस प्रकार सांस्कृतिक निर्धारकों के रूप में पितृसत्तात्मक मूल्यों मजबूत करके perpetuated. किसी भी समाज में न केवल हरियाणा, अगर लैंगिक असमानता के उच्च स्तर पर अनुमति दी जाती है, यह केवल तर्कसंगत है विषम लिंग अनुपात और कुछ महिलाओं को पुरुषों की दी गई संख्या (समय की अवधि में एक बहुपतित्व समाज में जिसके परिणामस्वरूप) के लिए उपलब्ध स्वीकार करने के लिए सामान्य नेतृत्व रहती है. यह और अधिक अत्याचार आदि में बलात्कार, महिलाओं, भावनात्मक गड़बड़ी की स्वास्थ्य समस्याओं के फार्म का और भी आर्थिक शोषण, कम वजन के शिशुओं जो बारी में और अधिक दूसरे राज्यों से दुल्हन की हृदय problems.Purchase के लिए प्रवण रहे हैं के जन्म में महिलाओं पर घरेलू और सामाजिक जिसके परिणामस्वरूप है झारखंड, उत्तरांचल, बिहार, बंगाल और उत्तर पूर्वी increase.In तरह हमारे सर्वेक्षण में 12 में 2004 गांवों में किया वहाँ खरीदा bides के 50 ऐसे मामले थे पर है. पिछले पंचायत चुनाव में इसे चुनावी मुद्दा बन गया है अगर वे जीतेंगे वे अधिक खरीदी दुल्हन की व्यवस्था करेंगे.
जब हम अध्ययन गांवों में महिलाओं के समूह के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की, वे एक ग़लतफ़हमी है कि यदि उनकी संख्या कम हो जाती है, अपने मूल्य में वृद्धि होगी की थी. वास्तव में
महिलाओं की संख्या में कमी अत्याचारों घरेलू और महिलाओं पर सामाजिक वृद्धि होगी
मांग और आपूर्ति के आर्थिक सिद्धांत अच्छी पकड़ नहीं करता है.
महिलाओं प्याज या टमाटर के साथ समानता नहीं कर सकते
सबसे दक्षिण एशियाई समाज में लिंग अनुपात कम उनके कम की स्थिति को दर्शाता है (हरियाणा के रूप में अच्छी तरह से)
बलात्कार, मजबूर विवाह, बहुपतित्व, सामाजिक असुरक्षा, सेक्स stereotyping, दुल्हन की खरीद हरियाणा में वृद्धि हुई है
महिलाओं को अपने घरों के भीतर रहने को मजबूर हो जाएगा
शक्तिशाली एक JANANKHANA दूसरों सेवक का सहारा जाएगा होगा का मतलब
हत्या करने से इनकार पर एक महिला जबरन एक स्वीकार आदर्श बन जाएगा यौन संबंध के लिए.
राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो, नई दिल्ली, कुल 1,15,723 महिलाओं से संबंधित है और 1996 में भारतीय दंड संहिता के तहत दर्ज मामलों में से 14,846 बलात्कार के हिसाब से प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार (12.8 प्रतिशत), 5513 दहेज मौतें (4.8 फीसदी ) और अत्याचार के मामलों 35246 (30.5 प्रतिशत).
1994 में, 98, 948 मामलों अपराध के तहत महिलाओं के खिलाफ दर्ज किए गए थे 83,954 मामलों की तुलना में 1992 में 1993 और 79037 में. आंकड़ा 1991 में 74,093 और 68,317 1990 में किया गया था.
महिलाओं के लिए राष्ट्रीय आयोग एक सांविधिक निकाय है महिला अधिनियम 1990 के लिए राष्ट्रीय आयोग के अधीन गठित की रक्षा के लिए और हितों को बढ़ावा देने और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा.
जनवरी से दिसंबर 2000 को, आयोग की 5268 की शिकायतों, जिसमें शामिल की कुल मिला दहेज 527 मौतें, 235 हत्या, बलात्कार 277, 11 छेड़छाड़, दहेज उत्पीड़न 963, यौन उत्पीड़न 131, 110 द्विविवाह, 267 पत्नियों और उत्पीड़न के अन्य प्रकार के परित्याग 2747.
उन्होंने यह भी कहा कि वे वे जब तक लड़की बच्चे के जन्म से अतिरिक्त ध्यान दिया है
साथ ही समाज में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है की वजह से शादी की और बाद में जीवन है. वे से पता चला है कि जब एक लड़की का जन्म होता है, वहाँ के 'Mattam' माहौल है और लड़के का जन्म होता है इस का जन्म पर एक 'थाली' 6 दिन उत्सव का sweets.Tradition के वितरण और पिटाई से मनाया जाता है जब एक लड़का 'छठ' वहाँ है . एक माँ जो एक लड़के को जन्म देने घी और एक लड़की को जन्म देने के माँ के 10 किलो दिया जाता है गांवों में 5 किलो दिया जाता है. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे जश्न मनाने की लड़कियों के 'Namkaran संस्कार', उन सभी को नकारात्मक में जवाब दे दिया. इसी प्रकार कई पारंपरिक भेदभावपूर्ण अंक चर्चा में आया था. (सूची बहुत लंबी है) फिर से लड़की की कीमत पर बेटा वरीयता के लिए इन सांस्कृतिक प्रथाओं के माध्यम से महिलाओं और एक समग्र रूप से समाज के मानस पलटा कंडीशनिंग की पुष्टि.
सुश्री Ruhani हरियाणा में 2005 में अध्ययन किया खुलासा मामलों था. वह एक बाल सर्जन के साथ एक साक्षात्कार में बताया था कि विकृति के लिए विभिन्न कारणों फ्लोराइड अतिरिक्त, प्रदूषण, खाद्य कीटनाशक, कीटनाशक और अवशिष्ट प्रभाव की कमी की तरह हैं. लेकिन वहाँ की विकृति के कई मामले हैं जहां वे कई लड़की issues.For यह वे से दवा लेने के एक बेटे को जन्म देने के लिए नीम हकीमों के बाद नर बच्चे हैं करना चाहते हैं. वास्तव में वे कुछ भी पहली तिमाही में नहीं 3 महीने की वजह से पूरे बच्चा ले जाना चाहिए है की स्थापना की. न्यूरल ट्यूब दोष बहुत ऐसे मामलों में आम है. वे रीढ़ की हड्डी के ऊपर से समाप्त करने के लिए प्रभाव. वे ऐसे मामलों में समाप्त होना चाहिए. ये एक PGIMS रोहतक के बाल सर्जन में से एक का विचार कर रहे हैं.
गांव से नरवाना जिला जींद. पवन कुमार, 40 अपने स्कूल का एक प्रमुख है और हाल ही दबाव में था, क्योंकि पूर्ण सुविधाओं के बिना स्कूलों नीचे जा रहा बंद हुए हैं. वह और Geetta, 32, मैट्रिक पास, 3 बेटियों को 14 और 13 है, 10 साल के बाद बेटी 3rd, वह अब 2 साल पुराना वह चार प्राकृतिक गर्भपात जहां एक समय में वहाँ भी थे एक लड़का और एक लड़की जुड़वां था.. बीच में रखो कॉपर टी. टोहाना के लिए गया था, और एंटीबायोटिक दवाओं का एक कोर्स किया था और उसके बाद which.she गर्भवती हो गई और तीसरी लड़की थी. यह गर्भावस्था के दौरान अपने पति Kalayat इस समय से बेटे के लिए dawai देसी मिल गया. नीम हकीम उन्हें बताया करने के लिए नहीं u / s मिल done.She एक महिला बच्चे और एक तिहाई लड़की माँ के लिए फिट बैठता है की प्रसव के बाद शुरू कर दिया और आधे घंटे दिया. फिट बैठता है की कोई पूर्व इतिहास. वह 3 घंटे की यात्रा में पांच फिट बैठता था. एक और लड़की के जन्म के कारण अवसाद में मिल गया. वह स्तन के लिए उसे दूध पिलाने या अपने दम पर खड़ा कर wasnot. बच्चे कपास द्वारा किया जा रहा था पैकेट दूध पिलाया.
Ompati 36 साल पुराने VPO Baas जिला, हिसार 18 वर्ष जो 2 साल पहले मर गया के एक बेटा था. के बारे में वह उसके पीछे एक और बच्चे को जब यह स्वाभाविक रूप से नहीं होता क्योंकि वह एक बेटा था नहीं होने के लिए परेशान नहीं किया .. वह गर्भवती हो गई. बहादुरगढ़ में एक चिकित्सक है जो उसे दवाई तीन महीने वह एक 7 महीने में एक विकृत बच्चे के प्रेरित गर्भपात करना था पर पीने के लिए दी से दवा था. विकृति अपरा पीछे, पश्चकपाल encephalocele और भ्रूण ascitis थे.
अब सवाल यह है कि चुनौतीपूर्ण स्थिति से कैसे प्रतिक्रिया करने के लिए. यह एक वास्तविक चुनौती है. जन्म के पूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1994 में दबाव का एक परिणाम के लिंग निर्धारण और लिंग प्रारंभिक चुनाव के खिलाफ मंच के द्वारा बनाई गई के रूप में लागू किया गया था. लेकिन इस पर अमल नहीं किया गया था. महिलाओं के अधिकार संगठनों द्वारा CEHAT MASUM, और डॉ. साबू जॉर्ज, जन्म के पूर्व निदान (विनियमन और दुरूपयोग निवारण) अधिनियम संशोधन तकनीकों के द्वारा और जनहित याचिका चुनाव प्रचार का एक दशक के बाद, 2002 17-1 पर भारत के राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त - 2003. कार्य लिंग चयन के निषेध के लिए "से पहले या बाद गर्भाधान, और जन्म के पूर्व निदान तकनीक की आनुवंशिक असामान्यताएं या विकारों चयापचय या सेक्स से जुड़े रोगों का पता लगाने के प्रयोजनों के लिए नियमन के लिए और लिंग निर्धारण के लिए उनके दुरुपयोग की रोकथाम महिला के लिए अग्रणी के लिए प्रदान करता है, और वहाँ के साथ जुड़ा हुआ या फिर "वहाँ आनुषंगिक मामलों के लिए भ्रूण हत्या. पीएनडीटी एक्ट संशोधन नियम 2003 लागू करने के नापाक girls.This लापता के लिए योगदान प्रथाओं को रोकने के मशीनरी सक्रिय कर लिया है सच है, लेकिन बहुत अधिक महत्वपूर्ण है, हम आगे एक महान कार्य किया है की हमें डॉक्टरों का सेट मन बदल यानी, बड़े पैमाने पर लोगों और विशेष रूप से शिकार महिलाओं, एक सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश उस लड़की बच्चे के जीवित रहने के लिए प्रवाहकीय है बनाने के लिए और व्यावसायिक दिमाग तकनीकी कामुक पूर्वाग्रहों पर संपन्न डॉक्स की गतिविधियों की निगरानी.
करने के लिए आसन्न महिला अभाव निराकरण करने के लिए और महिलाओं की स्थिति को ऊपर उठाने को प्रोत्साहित करने, नीति स्तर के परिवर्तन की जरूरत है और यह भी इन की जरूरत है वास्तव में होना करने के लिए दोनों सरकारी ढांचे और स्वैच्छिक संगठनों के माध्यम से राज्य के द्वारा लागू किया है.
पंजीयन और 6 सप्ताह से सभी गर्भधारण के 12 वें सप्ताह से आगे और निगरानी नहीं.
18 से 21 के लिए लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाएँ
सब लड़की बच्चों को अनिवार्य, मुक्त, गुणवत्ता की शिक्षा प्रदान करें ऊपर माध्यमिक स्कूल स्तर पर
बढ़ाएँ 50% सभी राज्य के निकायों के लिए एक feministic राजनीतिक संस्कृति महिलाओं के अनुकूल राजनीतिक कार्रवाई के लिए अनुकूल परिचय निर्णय लेने में महिलाओं को प्रतिनिधित्व.
उन्मूलन बच्चे और वयस्क महिलाओं के लिए रोजगार गारंटी श्रम.
लाओ नीति और कानूनी उपाय सुनिश्चित करने के लिए है कि महिलाओं के अधिकारों और उत्पादक संसाधनों पर नियंत्रण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए, है.
प्रदान जीवन स्वास्थ्य, पोषण, पानी, लैंगिक भेदभाव के बिना सभी बच्चों के लिए शिक्षा जैसे संसाधनों को बनाए रखना.
सौंपना पंचायतों को सत्ता महत्वपूर्ण आँकड़े पर विवरण के साथ जनसांख्यिकीय प्रोफाइल का एक रजिस्टर बनाए रखने के लिए.
फ़्रेम बच्चे की नीति और बालिकाओं नीति लड़की बच्चों के हित की रक्षा के लिए.
सभी स्तरों पर विस्तार लिंग संवेदीकरण नीति निर्माताओं, योजनाकारों, प्रशासकों और कार्यान्वयन के लिए प्रशिक्षण.
सभी नीतियों और कार्यक्रमों के लिए क्षेत्रीय-में बढ़ावा लिंग परिप्रेक्ष्य
हालांकि यह सच है कि शिक्षा में लैंगिक असमानता को कम करना होगा, आर्थिक अवसर है विरासत संपत्ति सहित कानून बनाने की सही करने के लिए अधिनियमित और लागू किया जाना है, और राजनैतिक शक्ति के लिए पुरुषों के साथ साझा किया जा गया है, लिंग असमानता की समस्या ही किया जा सकता है साक्षरता और शिक्षा वास्तविक अर्थों में है कि में 'आंदोलन' पर स्नातक करने के लिए जारी है के माध्यम से घेरने की कोशिश की महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उन्हें अपने जीवन के विभिन्न आयामों की देखभाल करने के लिए सब खुद के रूप में केरल प्रयोग कथन का प्रदर्शन किया था सकें.
इस सब के अलावा, विभिन्न स्तर के प्रयासों को लिंग और जातीय भेदभाव के मुद्दे पर लोगों को जागरूक किए जा रहे हैं. Navjagran धीमी गति से ही एक नया renaisance आंदोलन चल रहा है. 'एक नई Suruat "नाटक का उल्लेख यहाँ की जरूरत है इस नए renaisance आंदोलन यानी' Navjagaran 'करने के लिए हरियाणा के समाज के सभी वर्गों है कि इतना हरियाणा में एक नागरिक समाज बनाया जा सकता है के द्वारा समर्थित होना चाहिए. जहां लिंग और जाति discrimations के इन प्रकार होगा हो सकता है और वहाँ नहीं लापता लड़कियों को भी होगा और एक रिक्ति पैदा होने के लिए एक इंसान के रूप में जीवित रहते हैं. पिछले नहीं बल्कि कम से कम आपका Navjagran अभियान के रूप में योगदान है ---
एक छात्र •
हमें एक स्वयंसेवक के रूप में शामिल हों और अपने ओ varios गतिविधियों में योगदान
एक नागरिक •
ओ महिलाओं की पूर्व जन्म Elemination और अन्य सामाजिक मुद्दों के मुद्दे पर जानकारी का प्रसार में मदद करें.
ओ कृपया विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने कि HGVS आयोजन समय समय पर
उपयुक्त प्राधिकारी को PBEF के ओ आपके स्थानीय क्षेत्र में रिपोर्ट मामलों
एक शिक्षक •
आप सामाजिक तक इस मुद्दे और अन्य सामाजिक मुद्दों को लेकर संगठन का सदस्य बनने के लिए और छात्र और सामाजिक शामिल मुद्दों के बारे में अपने माता पिता के लिए बहुमूल्य जानकारी प्रदान कर सकते हे. उन्हें प्रोत्साहित करने के रूप में हमें में शामिल होने volunteers.HGVS ऐसे ही एक संगठन है.
ओ अपने विचारों मदद कर सकते हैं हम भविष्य में बेहतर काम करते हैं. हम आपको हमारे कार्यशालाओं और सेमिनारों Traing शिक्षक भाग लेने के लिए करना चाहते हैं.
एक माँ •
ओ अपने बच्चे की सुरक्षा को सर्वोच्च आप चिंता की बात है. आप एक बेटा और एक daughter.We बीच नहीं differentiatig द्वारा एक अमूल्य योगदान करने के लिए एक खास तरह से व्यवहार करते हैं tutured कर सकते हैं.
ओ यदि आप अपने परिवार से किसी भी दबाव में हैं के लिए 'देना' उन्हें एक बेटा है, हम आपको यह अनुरोध करने के लिए विरोध है, और यदि आवश्यक हो, तो संबंधित कानूनी अधिकार को या हमें करने के लिए रिपोर्ट.
घर में लिंग समानता को प्रोत्साहित ओ.
ओ चिकित्सा के लिए एक लड़का बच्चे को गर्भ धारण हस्तक्षेप की तलाश Donot.
एक पिता •
ओ तुम नहीं तुम्हारी पत्नी पर एक बेटे के लिए दबाव डालने से मदद कर सकता है
ओ सहायता आपकी पत्नी अगर उसके परिवार और रिश्तेदारों के दबाव रहे भ्रूण के लिंग dtermination गुजरना करने के लिए
ओ उसे मजबूर करने के लिए भ्रूण के लिंग निर्धारण और गर्भपात के नीचे जाने के लिए अगर यह एक महिला बच्चा है Donot, उसके पूर्व गर्भाधान के लिए में लिंग चयन जा रहा में मजबूर
एक (न कि बेटा या बेटी) बच्चे एक साथ लिया जाना चाहिए अपनी पत्नी के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए किया निर्णय ओ
ओ तुम एक बेटा और एक बेटी के बीच फर्क नहीं द्वारा एक बड़ा अंतर कर सकते हैं.
ओ चिकित्सा हस्तक्षेप की तलाश के लिए एक लड़का बच्चे को गर्भ धारण Donot
एक परिवार के सदस्य / रिश्तेदार •
ओ Donot परिवार में महिलाओं पर दबाव के लिए पूर्व प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण या गर्भधारण लिंग निर्धारण गुजरना डाल दिया.
कृपया ओ उसे समर्थन अगर परिवार में अन्य लोगों िंलग पर जोर दे रहे हैं
आपके परिवार में लैंगिक समानता के एक वकील रहो ओ.
• एक पेशेवर चिकित्सा
ओ अपने काम के लिए अपने ग्राहकों को सही जानकारी देने के लिए, और उन्हें सही निर्णय लेने में सहायता resposibility है. आप बेहद अभियान से मदद कर सकता
नहीं बाहर ले जाने के लिंग निर्धारण
नहीं माता पिता या परिवार के भ्रूण के लिंग का खुलासा
नहीं की अनुमति दी कानून के तहत समय सीमा से परे गर्भपात peforming.
नहीं पूर्व गर्भाधान में सहायता प्रदान करने लिंग चयन
रिपोर्टिंग ऐसी कोई उदाहरण या संबंधित कानूनी अधिकार के लिए ऊपर के किसी भी अभ्यास डॉक्टरों.
हमें महत्वपूर्ण भूमिका चिकित्सकों को साकार देश में लिंग अनुपात में सुधार लाने में खेल सकते हैं मदद से ओ.
एक मीडिया व्यक्ति •
विज्ञापन लिंग निर्धारण सुविधाओं की पेशकश प्रकाशित न करें ओ. इसके बजाय, अपनी पत्रिका या अखबार में लेख प्रकाशित करने के लिए PBEF, कानून के क्रियान्वयन में यह और कठिनाइयों पर रोक लगाने के कानून की जघन्य अभ्यास के बारे में जागरूकता पैदा करने के द्वारा एक सकारात्मक योगदान दे. अपने लेखन, चित्र, फिल्मों ,डोकु मिनट या किसी भी othermedium के माध्यम से बालिकाओं के कारण सहायता
आर एस दहिया
सर्जरी के प्रोफेसर
Pt.BDS PGIMS, रोहतक
हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति, रोहतक
9812139001-M
हरियाणा में गैंग रेप , रेप , छेड़छाड़ ,लापता लड़कियों और महिलाओं का मुद्दा एक खतरनाक स्तर तक चला गया है और गहराई से सिंहावलोकन की एक गंभीर इसलिए जरूरत है कि कुछ ठोस उपायों के बारे में सोचा जा सकता है. उपभोक्तावादी उन्मुख आर्थिक विकास, चिकित्सा और हमारे समाज में तथा डॉक्टर पेशे में लिंग भेद व पुत्र लालसा के व्यावसायीकरण, सामाजिक असुरक्षा का बढ़ना ,एक साथ इन सबने मिलकर एक दुखद व गम्भीर स्थिति पैदा की है लड़कियों के लापता होने के सदर्भ में '. लिंग अनुपात की ग्लोबल स्तर पर तुलना से पता चलता है कि यूरोप, उत्तरी अमेरिका, कैरिबियन, मध्य एशिया, लिंग अनुपात में उप सहारा अफ्रीका के सबसे गरीब क्षेत्रों इन देशों में महिला भ्रूण हत्या या / उपेक्षा ने ही लड़कियों को दोयम दर्ज दिया व बेटों को पैदा करने के लिए नयी प्रजनन प्रौद्योगिकी का उपयोग किया गया तथा यह सब एक रूप से औरत के लिए अनुकूल हैं . दूसरी ओर सबसे कम लिंग अनुपात भारत के कुछ भागों में पाया जाता है और हरियाणा उनमें से एक है. 0-6 साल में नीचे से कम के 10 जिलों में लिंग अनुपात के जिलों में 3 हरियाणा -- कुरुक्षेत्र-770, -783 सोनीपत , 784, अम्बाला हैं। .ऐसा व्यवहार पहले भी नजर आया लेकिन अब इसके साथ एक नया मोड़ आया है व्यापक प्रसार के साधनों के चलते और हरियाणा में नई प्रौद्योगिकियों के प्रयोग के चलते और हरित क्रांति की अवधि के बाद ई एक हिस्से की सम्पन्नता ने एक खास हालत पैदा किये हैं । वांछनीय और अवांछित की परिधारना विकसित हुई है जिस के चयन के सिद्धांत पर आधारित हैं. हरियाणा में वांछनीय "बच्चा लड़का है" और अवांछित "बच्ची" है और परिणाम स्पष्ट है. 2001 की जनगणना के परिणाम से पता चला है कि 927 लड़कियों के 1000 लड़कों के लिए लिंग अनुपात के साथ, भारत में 0-6 वर्ष के आयु वर्ग में 60 लाख लड़कियों का घाटा था, जब भारत ने नई सहस्राब्दी में प्रवेश किया. हरियाणा में हम 2001 की जनगणना के अनुसार 0-6 वर्ष के आयु समूह में 1,36,883 लड़कियों की कमी है. इन NRT महिला प्रजनन और वाणिज्यिक हितों से अधिक पितृसत्तात्मक नियंत्रण के संदर्भ में है रहे हैं महिलाओं की गरिमा और शारीरिक अखंडता के लिए बड़ा खतरा. दो बच्चे आदर्श नीति भी एक नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न किया है महिलाओं की पूर्व जन्म उन्मूलन के समर्थकों के आगे रख जैसे विभिन्न तर्क 'वेतन 500 रुपए और अब 5 रु, 00,000 बाद में बचाने के लिए' और 'महिलाओं के विकल्प "महिलाओं के विकल्प के रूप में अगर बना रहे हैं. शून्य में नहीं है और ठोस समाज में. गर्भपात जैसे विरोध किया जा रहा है. यह भी स्पष्ट किया कि गर्भपात करने का अधिकार महिलाओं का एक अनिवार्य ठीक है, एक तरह से अपने जीवन, अपने शरीर और प्रजनन क्षमता का निर्धारण अधिकार के रूप में रहना चाहिए की जरूरत है.
इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है और महत्वपूर्ण सवाल हम हरियाणवी लड़कियों एक लुप्तप्राय प्रजातियों बन करने की अनुमति सकता है? निश्चित रूप से "नहीं".
डा. साबू जॉर्ज अपने आप को और रोहतक जिला (विभाजन से पहले) में लगभग 13,000 की ग्रामीण आबादी में ग्रामीण हरियाणा में कन्या भ्रूण हत्या पर एक अध्ययन किया है और हम 1000 से भी अधिक महिलाओं साक्षात्कार करने के लिए गर्भावस्था परिणाम पता 1995 के लिए 2000.We के दौरान पाया गया कि 'संस केवल' और 'सन्स अवश्य सिंड्रोम "कर दिया गया है कन्या भ्रूण हत्या का सहारा, आधुनिक तकनीकी उपकरणों का उपयोग करके, इस प्रकार सांस्कृतिक निर्धारकों के रूप में पितृसत्तात्मक मूल्यों मजबूत करके perpetuated. किसी भी समाज में न केवल हरियाणा, अगर लैंगिक असमानता के उच्च स्तर पर अनुमति दी जाती है, यह केवल तर्कसंगत है विषम लिंग अनुपात और कुछ महिलाओं को पुरुषों की दी गई संख्या (समय की अवधि में एक बहुपतित्व समाज में जिसके परिणामस्वरूप) के लिए उपलब्ध स्वीकार करने के लिए सामान्य नेतृत्व रहती है. यह और अधिक अत्याचार आदि में बलात्कार, महिलाओं, भावनात्मक गड़बड़ी की स्वास्थ्य समस्याओं के फार्म का और भी आर्थिक शोषण, कम वजन के शिशुओं जो बारी में और अधिक दूसरे राज्यों से दुल्हन की हृदय problems.Purchase के लिए प्रवण रहे हैं के जन्म में महिलाओं पर घरेलू और सामाजिक जिसके परिणामस्वरूप है झारखंड, उत्तरांचल, बिहार, बंगाल और उत्तर पूर्वी increase.In तरह हमारे सर्वेक्षण में 12 में 2004 गांवों में किया वहाँ खरीदा bides के 50 ऐसे मामले थे पर है. पिछले पंचायत चुनाव में इसे चुनावी मुद्दा बन गया है अगर वे जीतेंगे वे अधिक खरीदी दुल्हन की व्यवस्था करेंगे.
जब हम अध्ययन गांवों में महिलाओं के समूह के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की, वे एक ग़लतफ़हमी है कि यदि उनकी संख्या कम हो जाती है, अपने मूल्य में वृद्धि होगी की थी. वास्तव में
महिलाओं की संख्या में कमी अत्याचारों घरेलू और महिलाओं पर सामाजिक वृद्धि होगी
मांग और आपूर्ति के आर्थिक सिद्धांत अच्छी पकड़ नहीं करता है.
महिलाओं प्याज या टमाटर के साथ समानता नहीं कर सकते
सबसे दक्षिण एशियाई समाज में लिंग अनुपात कम उनके कम की स्थिति को दर्शाता है (हरियाणा के रूप में अच्छी तरह से)
बलात्कार, मजबूर विवाह, बहुपतित्व, सामाजिक असुरक्षा, सेक्स stereotyping, दुल्हन की खरीद हरियाणा में वृद्धि हुई है
महिलाओं को अपने घरों के भीतर रहने को मजबूर हो जाएगा
शक्तिशाली एक JANANKHANA दूसरों सेवक का सहारा जाएगा होगा का मतलब
हत्या करने से इनकार पर एक महिला जबरन एक स्वीकार आदर्श बन जाएगा यौन संबंध के लिए.
राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो, नई दिल्ली, कुल 1,15,723 महिलाओं से संबंधित है और 1996 में भारतीय दंड संहिता के तहत दर्ज मामलों में से 14,846 बलात्कार के हिसाब से प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार (12.8 प्रतिशत), 5513 दहेज मौतें (4.8 फीसदी ) और अत्याचार के मामलों 35246 (30.5 प्रतिशत).
1994 में, 98, 948 मामलों अपराध के तहत महिलाओं के खिलाफ दर्ज किए गए थे 83,954 मामलों की तुलना में 1992 में 1993 और 79037 में. आंकड़ा 1991 में 74,093 और 68,317 1990 में किया गया था.
महिलाओं के लिए राष्ट्रीय आयोग एक सांविधिक निकाय है महिला अधिनियम 1990 के लिए राष्ट्रीय आयोग के अधीन गठित की रक्षा के लिए और हितों को बढ़ावा देने और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा.
जनवरी से दिसंबर 2000 को, आयोग की 5268 की शिकायतों, जिसमें शामिल की कुल मिला दहेज 527 मौतें, 235 हत्या, बलात्कार 277, 11 छेड़छाड़, दहेज उत्पीड़न 963, यौन उत्पीड़न 131, 110 द्विविवाह, 267 पत्नियों और उत्पीड़न के अन्य प्रकार के परित्याग 2747.
उन्होंने यह भी कहा कि वे वे जब तक लड़की बच्चे के जन्म से अतिरिक्त ध्यान दिया है
साथ ही समाज में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है की वजह से शादी की और बाद में जीवन है. वे से पता चला है कि जब एक लड़की का जन्म होता है, वहाँ के 'Mattam' माहौल है और लड़के का जन्म होता है इस का जन्म पर एक 'थाली' 6 दिन उत्सव का sweets.Tradition के वितरण और पिटाई से मनाया जाता है जब एक लड़का 'छठ' वहाँ है . एक माँ जो एक लड़के को जन्म देने घी और एक लड़की को जन्म देने के माँ के 10 किलो दिया जाता है गांवों में 5 किलो दिया जाता है. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे जश्न मनाने की लड़कियों के 'Namkaran संस्कार', उन सभी को नकारात्मक में जवाब दे दिया. इसी प्रकार कई पारंपरिक भेदभावपूर्ण अंक चर्चा में आया था. (सूची बहुत लंबी है) फिर से लड़की की कीमत पर बेटा वरीयता के लिए इन सांस्कृतिक प्रथाओं के माध्यम से महिलाओं और एक समग्र रूप से समाज के मानस पलटा कंडीशनिंग की पुष्टि.
सुश्री Ruhani हरियाणा में 2005 में अध्ययन किया खुलासा मामलों था. वह एक बाल सर्जन के साथ एक साक्षात्कार में बताया था कि विकृति के लिए विभिन्न कारणों फ्लोराइड अतिरिक्त, प्रदूषण, खाद्य कीटनाशक, कीटनाशक और अवशिष्ट प्रभाव की कमी की तरह हैं. लेकिन वहाँ की विकृति के कई मामले हैं जहां वे कई लड़की issues.For यह वे से दवा लेने के एक बेटे को जन्म देने के लिए नीम हकीमों के बाद नर बच्चे हैं करना चाहते हैं. वास्तव में वे कुछ भी पहली तिमाही में नहीं 3 महीने की वजह से पूरे बच्चा ले जाना चाहिए है की स्थापना की. न्यूरल ट्यूब दोष बहुत ऐसे मामलों में आम है. वे रीढ़ की हड्डी के ऊपर से समाप्त करने के लिए प्रभाव. वे ऐसे मामलों में समाप्त होना चाहिए. ये एक PGIMS रोहतक के बाल सर्जन में से एक का विचार कर रहे हैं.
गांव से नरवाना जिला जींद. पवन कुमार, 40 अपने स्कूल का एक प्रमुख है और हाल ही दबाव में था, क्योंकि पूर्ण सुविधाओं के बिना स्कूलों नीचे जा रहा बंद हुए हैं. वह और Geetta, 32, मैट्रिक पास, 3 बेटियों को 14 और 13 है, 10 साल के बाद बेटी 3rd, वह अब 2 साल पुराना वह चार प्राकृतिक गर्भपात जहां एक समय में वहाँ भी थे एक लड़का और एक लड़की जुड़वां था.. बीच में रखो कॉपर टी. टोहाना के लिए गया था, और एंटीबायोटिक दवाओं का एक कोर्स किया था और उसके बाद which.she गर्भवती हो गई और तीसरी लड़की थी. यह गर्भावस्था के दौरान अपने पति Kalayat इस समय से बेटे के लिए dawai देसी मिल गया. नीम हकीम उन्हें बताया करने के लिए नहीं u / s मिल done.She एक महिला बच्चे और एक तिहाई लड़की माँ के लिए फिट बैठता है की प्रसव के बाद शुरू कर दिया और आधे घंटे दिया. फिट बैठता है की कोई पूर्व इतिहास. वह 3 घंटे की यात्रा में पांच फिट बैठता था. एक और लड़की के जन्म के कारण अवसाद में मिल गया. वह स्तन के लिए उसे दूध पिलाने या अपने दम पर खड़ा कर wasnot. बच्चे कपास द्वारा किया जा रहा था पैकेट दूध पिलाया.
Ompati 36 साल पुराने VPO Baas जिला, हिसार 18 वर्ष जो 2 साल पहले मर गया के एक बेटा था. के बारे में वह उसके पीछे एक और बच्चे को जब यह स्वाभाविक रूप से नहीं होता क्योंकि वह एक बेटा था नहीं होने के लिए परेशान नहीं किया .. वह गर्भवती हो गई. बहादुरगढ़ में एक चिकित्सक है जो उसे दवाई तीन महीने वह एक 7 महीने में एक विकृत बच्चे के प्रेरित गर्भपात करना था पर पीने के लिए दी से दवा था. विकृति अपरा पीछे, पश्चकपाल encephalocele और भ्रूण ascitis थे.
अब सवाल यह है कि चुनौतीपूर्ण स्थिति से कैसे प्रतिक्रिया करने के लिए. यह एक वास्तविक चुनौती है. जन्म के पूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1994 में दबाव का एक परिणाम के लिंग निर्धारण और लिंग प्रारंभिक चुनाव के खिलाफ मंच के द्वारा बनाई गई के रूप में लागू किया गया था. लेकिन इस पर अमल नहीं किया गया था. महिलाओं के अधिकार संगठनों द्वारा CEHAT MASUM, और डॉ. साबू जॉर्ज, जन्म के पूर्व निदान (विनियमन और दुरूपयोग निवारण) अधिनियम संशोधन तकनीकों के द्वारा और जनहित याचिका चुनाव प्रचार का एक दशक के बाद, 2002 17-1 पर भारत के राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त - 2003. कार्य लिंग चयन के निषेध के लिए "से पहले या बाद गर्भाधान, और जन्म के पूर्व निदान तकनीक की आनुवंशिक असामान्यताएं या विकारों चयापचय या सेक्स से जुड़े रोगों का पता लगाने के प्रयोजनों के लिए नियमन के लिए और लिंग निर्धारण के लिए उनके दुरुपयोग की रोकथाम महिला के लिए अग्रणी के लिए प्रदान करता है, और वहाँ के साथ जुड़ा हुआ या फिर "वहाँ आनुषंगिक मामलों के लिए भ्रूण हत्या. पीएनडीटी एक्ट संशोधन नियम 2003 लागू करने के नापाक girls.This लापता के लिए योगदान प्रथाओं को रोकने के मशीनरी सक्रिय कर लिया है सच है, लेकिन बहुत अधिक महत्वपूर्ण है, हम आगे एक महान कार्य किया है की हमें डॉक्टरों का सेट मन बदल यानी, बड़े पैमाने पर लोगों और विशेष रूप से शिकार महिलाओं, एक सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश उस लड़की बच्चे के जीवित रहने के लिए प्रवाहकीय है बनाने के लिए और व्यावसायिक दिमाग तकनीकी कामुक पूर्वाग्रहों पर संपन्न डॉक्स की गतिविधियों की निगरानी.
करने के लिए आसन्न महिला अभाव निराकरण करने के लिए और महिलाओं की स्थिति को ऊपर उठाने को प्रोत्साहित करने, नीति स्तर के परिवर्तन की जरूरत है और यह भी इन की जरूरत है वास्तव में होना करने के लिए दोनों सरकारी ढांचे और स्वैच्छिक संगठनों के माध्यम से राज्य के द्वारा लागू किया है.
पंजीयन और 6 सप्ताह से सभी गर्भधारण के 12 वें सप्ताह से आगे और निगरानी नहीं.
18 से 21 के लिए लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाएँ
सब लड़की बच्चों को अनिवार्य, मुक्त, गुणवत्ता की शिक्षा प्रदान करें ऊपर माध्यमिक स्कूल स्तर पर
बढ़ाएँ 50% सभी राज्य के निकायों के लिए एक feministic राजनीतिक संस्कृति महिलाओं के अनुकूल राजनीतिक कार्रवाई के लिए अनुकूल परिचय निर्णय लेने में महिलाओं को प्रतिनिधित्व.
उन्मूलन बच्चे और वयस्क महिलाओं के लिए रोजगार गारंटी श्रम.
लाओ नीति और कानूनी उपाय सुनिश्चित करने के लिए है कि महिलाओं के अधिकारों और उत्पादक संसाधनों पर नियंत्रण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए, है.
प्रदान जीवन स्वास्थ्य, पोषण, पानी, लैंगिक भेदभाव के बिना सभी बच्चों के लिए शिक्षा जैसे संसाधनों को बनाए रखना.
सौंपना पंचायतों को सत्ता महत्वपूर्ण आँकड़े पर विवरण के साथ जनसांख्यिकीय प्रोफाइल का एक रजिस्टर बनाए रखने के लिए.
फ़्रेम बच्चे की नीति और बालिकाओं नीति लड़की बच्चों के हित की रक्षा के लिए.
सभी स्तरों पर विस्तार लिंग संवेदीकरण नीति निर्माताओं, योजनाकारों, प्रशासकों और कार्यान्वयन के लिए प्रशिक्षण.
सभी नीतियों और कार्यक्रमों के लिए क्षेत्रीय-में बढ़ावा लिंग परिप्रेक्ष्य
हालांकि यह सच है कि शिक्षा में लैंगिक असमानता को कम करना होगा, आर्थिक अवसर है विरासत संपत्ति सहित कानून बनाने की सही करने के लिए अधिनियमित और लागू किया जाना है, और राजनैतिक शक्ति के लिए पुरुषों के साथ साझा किया जा गया है, लिंग असमानता की समस्या ही किया जा सकता है साक्षरता और शिक्षा वास्तविक अर्थों में है कि में 'आंदोलन' पर स्नातक करने के लिए जारी है के माध्यम से घेरने की कोशिश की महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उन्हें अपने जीवन के विभिन्न आयामों की देखभाल करने के लिए सब खुद के रूप में केरल प्रयोग कथन का प्रदर्शन किया था सकें.
इस सब के अलावा, विभिन्न स्तर के प्रयासों को लिंग और जातीय भेदभाव के मुद्दे पर लोगों को जागरूक किए जा रहे हैं. Navjagran धीमी गति से ही एक नया renaisance आंदोलन चल रहा है. 'एक नई Suruat "नाटक का उल्लेख यहाँ की जरूरत है इस नए renaisance आंदोलन यानी' Navjagaran 'करने के लिए हरियाणा के समाज के सभी वर्गों है कि इतना हरियाणा में एक नागरिक समाज बनाया जा सकता है के द्वारा समर्थित होना चाहिए. जहां लिंग और जाति discrimations के इन प्रकार होगा हो सकता है और वहाँ नहीं लापता लड़कियों को भी होगा और एक रिक्ति पैदा होने के लिए एक इंसान के रूप में जीवित रहते हैं. पिछले नहीं बल्कि कम से कम आपका Navjagran अभियान के रूप में योगदान है ---
एक छात्र •
हमें एक स्वयंसेवक के रूप में शामिल हों और अपने ओ varios गतिविधियों में योगदान
एक नागरिक •
ओ महिलाओं की पूर्व जन्म Elemination और अन्य सामाजिक मुद्दों के मुद्दे पर जानकारी का प्रसार में मदद करें.
ओ कृपया विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने कि HGVS आयोजन समय समय पर
उपयुक्त प्राधिकारी को PBEF के ओ आपके स्थानीय क्षेत्र में रिपोर्ट मामलों
एक शिक्षक •
आप सामाजिक तक इस मुद्दे और अन्य सामाजिक मुद्दों को लेकर संगठन का सदस्य बनने के लिए और छात्र और सामाजिक शामिल मुद्दों के बारे में अपने माता पिता के लिए बहुमूल्य जानकारी प्रदान कर सकते हे. उन्हें प्रोत्साहित करने के रूप में हमें में शामिल होने volunteers.HGVS ऐसे ही एक संगठन है.
ओ अपने विचारों मदद कर सकते हैं हम भविष्य में बेहतर काम करते हैं. हम आपको हमारे कार्यशालाओं और सेमिनारों Traing शिक्षक भाग लेने के लिए करना चाहते हैं.
एक माँ •
ओ अपने बच्चे की सुरक्षा को सर्वोच्च आप चिंता की बात है. आप एक बेटा और एक daughter.We बीच नहीं differentiatig द्वारा एक अमूल्य योगदान करने के लिए एक खास तरह से व्यवहार करते हैं tutured कर सकते हैं.
ओ यदि आप अपने परिवार से किसी भी दबाव में हैं के लिए 'देना' उन्हें एक बेटा है, हम आपको यह अनुरोध करने के लिए विरोध है, और यदि आवश्यक हो, तो संबंधित कानूनी अधिकार को या हमें करने के लिए रिपोर्ट.
घर में लिंग समानता को प्रोत्साहित ओ.
ओ चिकित्सा के लिए एक लड़का बच्चे को गर्भ धारण हस्तक्षेप की तलाश Donot.
एक पिता •
ओ तुम नहीं तुम्हारी पत्नी पर एक बेटे के लिए दबाव डालने से मदद कर सकता है
ओ सहायता आपकी पत्नी अगर उसके परिवार और रिश्तेदारों के दबाव रहे भ्रूण के लिंग dtermination गुजरना करने के लिए
ओ उसे मजबूर करने के लिए भ्रूण के लिंग निर्धारण और गर्भपात के नीचे जाने के लिए अगर यह एक महिला बच्चा है Donot, उसके पूर्व गर्भाधान के लिए में लिंग चयन जा रहा में मजबूर
एक (न कि बेटा या बेटी) बच्चे एक साथ लिया जाना चाहिए अपनी पत्नी के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए किया निर्णय ओ
ओ तुम एक बेटा और एक बेटी के बीच फर्क नहीं द्वारा एक बड़ा अंतर कर सकते हैं.
ओ चिकित्सा हस्तक्षेप की तलाश के लिए एक लड़का बच्चे को गर्भ धारण Donot
एक परिवार के सदस्य / रिश्तेदार •
ओ Donot परिवार में महिलाओं पर दबाव के लिए पूर्व प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण या गर्भधारण लिंग निर्धारण गुजरना डाल दिया.
कृपया ओ उसे समर्थन अगर परिवार में अन्य लोगों िंलग पर जोर दे रहे हैं
आपके परिवार में लैंगिक समानता के एक वकील रहो ओ.
• एक पेशेवर चिकित्सा
ओ अपने काम के लिए अपने ग्राहकों को सही जानकारी देने के लिए, और उन्हें सही निर्णय लेने में सहायता resposibility है. आप बेहद अभियान से मदद कर सकता
नहीं बाहर ले जाने के लिंग निर्धारण
नहीं माता पिता या परिवार के भ्रूण के लिंग का खुलासा
नहीं की अनुमति दी कानून के तहत समय सीमा से परे गर्भपात peforming.
नहीं पूर्व गर्भाधान में सहायता प्रदान करने लिंग चयन
रिपोर्टिंग ऐसी कोई उदाहरण या संबंधित कानूनी अधिकार के लिए ऊपर के किसी भी अभ्यास डॉक्टरों.
हमें महत्वपूर्ण भूमिका चिकित्सकों को साकार देश में लिंग अनुपात में सुधार लाने में खेल सकते हैं मदद से ओ.
एक मीडिया व्यक्ति •
विज्ञापन लिंग निर्धारण सुविधाओं की पेशकश प्रकाशित न करें ओ. इसके बजाय, अपनी पत्रिका या अखबार में लेख प्रकाशित करने के लिए PBEF, कानून के क्रियान्वयन में यह और कठिनाइयों पर रोक लगाने के कानून की जघन्य अभ्यास के बारे में जागरूकता पैदा करने के द्वारा एक सकारात्मक योगदान दे. अपने लेखन, चित्र, फिल्मों ,डोकु मिनट या किसी भी othermedium के माध्यम से बालिकाओं के कारण सहायता
आर एस दहिया
सर्जरी के प्रोफेसर
Pt.BDS PGIMS, रोहतक
हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति, रोहतक
9812139001-M
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